जटिल गर्भावस्था में चिकित्सकीय सतर्कता से सुरक्षित प्रसव, महिला ने स्वस्थ पुत्र को दिया जन्म सफलतापूर्वक

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आसनसोल :  जटिल गर्भावस्था से जूझ रही एक महिला ने चिकित्सकों की सतर्क निगरानी, समय पर उपचार और निरंतर देखरेख के बाद सोमवार को स्वस्थ शिशु को जन्म दिया। गर्भावस्था के पांचवें माह में समयपूर्व प्रसव पीड़ा शुरू होने से गर्भपात की आशंका उत्पन्न हो गई थी, लेकिन विशेषज्ञ उपचार के कारण गर्भावस्था पूर्ण अवधि तक सुरक्षित रही और महिला ने 2.7 किलोग्राम वजन के स्वस्थ पुत्र को जन्म दिया। वर्तमान में मां और नवजात दोनों स्वस्थ बताए जा रहे हैं।

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अस्पताल सूत्रों के अनुसार, महिला की पहचान गोपनीय रखी गई है। वह लंबे समय से मातृत्व की प्रतीक्षा कर रही थीं और बेंगलुरु के एक निजी अस्पताल में नियमित प्रसवपूर्व जांच करवा रही थीं। गर्भावस्था के पांचवें महीने में अचानक प्रसव पीड़ा शुरू होने पर चिकित्सकीय परीक्षण में स्थिति अत्यंत गंभीर पाई गई। प्रारंभिक जांच में गर्भाशय ग्रीवा समय से पहले खुलने और गर्भ संबंधी जटिलताओं के संकेत मिले, जिससे गर्भपात की आशंका व्यक्त की गई।

परिवार के एक परिचित की सलाह पर महिला आगे के उपचार के लिए आसनसोल पहुंचीं, जहां स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. जयशंकर साहा ने उनकी विस्तृत जांच कराई। अल्ट्रासोनोग्राफी (यूएसजी) सहित आवश्यक परीक्षणों के बाद चिकित्सकीय टीम ने स्थिति का गहन मूल्यांकन किया और गर्भ को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से विशेष उपचार योजना तैयार की।

 

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डॉ. साहा ने बताया कि गर्भावस्था अत्यंत संवेदनशील अवस्था में थी, इसलिए मरीज को लगातार चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया। नियमित अंतराल पर अल्ट्रासोनोग्राफी और अन्य आवश्यक परीक्षणों के माध्यम से भ्रूण के विकास पर नजर रखी गई। लगभग चार महीने तक विशेष सावधानी, दवाओं और चिकित्सकीय परामर्श के साथ गर्भावस्था को सुरक्षित बनाए रखने का प्रयास किया गया।

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गर्भस्थ शिशु के पूर्ण विकसित होने की पुष्टि के बाद चिकित्सकों ने सिजेरियन शल्यक्रिया का निर्णय लिया। सफल ऑपरेशन के माध्यम से 2.7 किलोग्राम वजन के स्वस्थ पुत्र का जन्म हुआ। प्रसव के बाद मां और नवजात दोनों की स्वास्थ्य स्थिति सामान्य पाई गई तथा आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

चिकित्सकों का कहना है कि समयपूर्व प्रसव पीड़ा और गर्भाशय ग्रीवा से जुड़ी जटिलताएं गर्भावस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकती हैं। ऐसे मामलों में समय पर विशेषज्ञ परामर्श, नियमित जांच और सतत चिकित्सकीय निगरानी अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। विशेषज्ञों ने गर्भवती महिलाओं से किसी भी असामान्य लक्षण की स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की है, ताकि समय रहते उपचार कर मां और शिशु दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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