रानीगंज : गुरुवार को रानीगंज की ऐतिहासिक एवं 103 वर्ष पुरानी पीतल रथयात्रा श्रद्धा, परंपरा और सांस्कृतिक वैभव के साथ संपन्न हुई। सियारसोल राजपरिवार की इस दुर्लभ धार्मिक धरोहर के दर्शन और रथ की रस्सी खींचने के लिए हजारों श्रद्धालु दूर-दूर से रानीगंज पहुंचे। पूरे नगर में “जय जगन्नाथ” के उद्घोष, भजन-कीर्तन और धार्मिक उल्लास के बीच रथयात्रा का भव्य आयोजन संपन्न हुआ।

इस अवसर पर राज्य सरकार के मंत्री अग्निमित्रा पाल एवं अजय पोद्दार सहित क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और गणमान्य व्यक्तियों ने भी रथ की रस्सी खींचकर भगवान श्रीजगन्नाथ से प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और जनकल्याण की प्रार्थना की। श्रद्धालुओं ने इसे सौभाग्य और आध्यात्मिक आस्था का प्रतीक बताया।
ऐतिहासिक परंपरा के अनुसार विशाल पीतल का रथ नई राजबाड़ी से यात्रा प्रारंभ कर पुरानी राजबाड़ी तक पहुंचा। मार्ग के दोनों ओर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। लोगों ने पुष्पवर्षा कर भगवान श्रीजगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा का स्वागत किया। धार्मिक वातावरण में भक्ति का अनुपम दृश्य देखने को मिला।
रानीगंज की यह रथयात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक विरासत का जीवंत प्रतीक मानी जाती है। स्थानीय इतिहास के अनुसार वर्ष 1925 से पूर्व यहां लकड़ी के रथ पर भगवान श्रीजगन्नाथ की यात्रा निकाली जाती थी। बाद में अग्निकांड में उस रथ के नष्ट हो जाने के उपरांत सियारसोल राजपरिवार के सदस्य प्रमथनाथ मालिया ने कोलकाता के प्रसिद्ध शिल्पकारों से भव्य पीतल का रथ बनवाया। तभी से यह अद्वितीय रथ क्षेत्र की धार्मिक पहचान बन गया।
इस रथ की विशेषता इसकी उत्कृष्ट शिल्पकला है। रथ के चारों ओर रामायण, महाभारत तथा भगवान श्रीकृष्ण की विविध लीलाओं को आकर्षक मूर्तिकला के माध्यम से उकेरा गया है। रथ में भगवान श्रीजगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के साथ राजपरिवार के कुलदेवता श्री दामोदर चंद्र जिउ भी विराजमान रहते हैं, जो इसकी विशिष्ट धार्मिक परंपरा को और अधिक गौरव प्रदान करते हैं।

रथयात्रा के साथ प्रारंभ हुआ पारंपरिक मेला भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना रहा। मेले में कृषि उपकरण, हस्तशिल्प, घरेलू उपयोग की वस्तुएं, पौधों की नर्सरी, पारंपरिक अचार, श्रृंगार सामग्री, खिलौने तथा स्थानीय व्यंजनों की दुकानों पर दिनभर भारी भीड़ रही। बच्चों के लिए झूले और मनोरंजन के अन्य साधनों ने उत्सव का आकर्षण और बढ़ा दिया। आयोजकों के अनुसार यह मेला आगामी पंद्रह दिनों तक जारी रहेगा।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने कहा कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक उत्सव समाज में सद्भाव, सामाजिक एकता और भारतीय परंपराओं के संरक्षण का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने रानीगंज की इस ऐतिहासिक पीतल रथयात्रा को राज्य की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर बताते हुए इसके संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता पर बल दिया।
भक्ति, परंपरा और सांस्कृतिक गौरव के अद्भुत संगम के रूप में संपन्न हुई यह ऐतिहासिक रथयात्रा एक बार फिर रानीगंज की समृद्ध धार्मिक विरासत को नई पहचान देने में सफल रही।















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