आसनसोल : सोमवार को आसनसोल के ऐतिहासिक एवं आस्था के प्रमुख केंद्र घाघर बुड़ी मंदिर परिसर में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जनजागरूकता को समर्पित विशेष अभियान ‘स्वच्छता से स्वागत’ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर राज्य की नगर प्रशासन एवं शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पाल ने मंदिर परिसर का निरीक्षण कर श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों को स्वच्छता बनाए रखने तथा धार्मिक स्थलों को प्लास्टिक मुक्त रखने का संकल्प दिलाया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, मंदिर प्रबंधन समिति के सदस्य, नगर निगम के अधिकारी तथा स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि धार्मिक स्थल केवल पूजा-अर्चना के केंद्र नहीं होते, बल्कि वे हमारी संस्कृति, आस्था और सामाजिक मूल्यों के प्रतीक भी हैं। ऐसे पवित्र स्थानों की स्वच्छता बनाए रखना प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि यदि मंदिर परिसर स्वच्छ और व्यवस्थित रहेगा तो श्रद्धालुओं को भी बेहतर वातावरण मिलेगा तथा धार्मिक गरिमा बनी रहेगी।
मंत्री ने मंदिर परिसर में स्वच्छता बनाए रखने के लिए कुछ आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी किए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मंदिर परिसर में किसी भी प्रकार के प्लास्टिक बैग के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। इसके साथ ही गुटखा, पान मसाला, तंबाकू तथा अन्य नशीले उत्पादों को मंदिर परिसर में लाने अथवा उनका सेवन करने की अनुमति नहीं होगी। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे इन नियमों का पूरी निष्ठा से पालन करें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि स्वच्छता केवल सरकारी अभियान नहीं, बल्कि जनभागीदारी का विषय है। जिस प्रकार लोग अपने घरों को साफ-सुथरा रखते हैं, उसी प्रकार घर के बाहर की सड़क, गलियां, पार्क, सार्वजनिक स्थल और धार्मिक परिसर को भी स्वच्छ रखना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ वातावरण से ही स्वस्थ समाज का निर्माण संभव है।
मंत्री ने निजी भूखंडों के मालिकों से भी विशेष आग्रह किया कि वे अपनी खाली पड़ी जमीनों की नियमित सफाई कराएं। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर खाली भूखंडों में कचरा, झाड़ियां और गंदगी जमा होने से बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए ऐसे स्थानों की साफ-सफाई सुनिश्चित करना संबंधित भूमि स्वामी की जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम के दौरान मंदिर प्रबंधन समिति ने भी श्रद्धालुओं से स्वच्छता अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की। स्वयंसेवकों ने लोगों को प्लास्टिक का उपयोग कम करने, कूड़ा निर्धारित स्थान पर डालने तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया।
अंत में उपस्थित लोगों ने मंदिर परिसर को स्वच्छ, प्लास्टिक मुक्त और प्रदूषण रहित बनाए रखने का सामूहिक संकल्प लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल एक दिन की सफाई तक सीमित न रहकर समाज में स्थायी स्वच्छता संस्कृति विकसित करना रहा। आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि जनसहभागिता और जागरूकता के माध्यम से धार्मिक स्थलों सहित पूरे शहर को स्वच्छ, सुंदर और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में यह अभियान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
















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