आसनसोल : सोमवार को आसनसोल जिला अदालत परिसर में उस समय असामान्य स्थिति उत्पन्न हो गई, जब पुलिस प्रशासन द्वारा अधिवक्ताओं के साथ कथित दुर्व्यवहार के विरोध में आसनसोल बार एसोसिएशन ने एकदिवसीय हड़ताल का आह्वान किया। आंदोलन के तहत अधिवक्ताओं ने अदालत के मुख्य प्रवेश द्वार पर धरना-प्रदर्शन करते हुए न्यायिक कार्यों का बहिष्कार किया। इसके चलते अदालत का नियमित कामकाज प्रभावित हुआ और विभिन्न मामलों की सुनवाई भी बाधित रही। न्यायालय पहुंचे वादियों, अधिवक्ताओं और अन्य पक्षकारों को दिनभर परेशानी का सामना करना पड़ा।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अरुणाभ मुखर्जी ने बताया कि हाल ही में कुछ बाहरी व्यक्तियों ने कुछ अधिवक्ताओं के विरुद्ध पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। उनका आरोप है कि शिकायत के समय संबंधित अधिवक्ता न्यायालय परिसर में मौजूद भी नहीं थे, इसके बावजूद पुलिस ने बिना पर्याप्त जांच-पड़ताल किए मामला दर्ज कर लिया। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई से अधिवक्ताओं में गहरा असंतोष है और इसे कानून के जानकारों की गरिमा के विपरीत माना जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम के विरोध में शनिवार को अधिवक्ताओं ने सांकेतिक धरना दिया था, लेकिन जब उनकी मांगों पर कोई ठोस पहल नहीं हुई तो सोमवार को आंदोलन को और तेज करने का निर्णय लिया गया। इसी क्रम में अधिवक्ताओं ने अदालत के मुख्य द्वार पर विरोध प्रदर्शन करते हुए न्यायिक कार्यों से स्वयं को अलग रखा।
प्रदर्शन के दौरान अदालत परिसर में विभिन्न थानों से पहुंचे पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को भी अंदर प्रवेश करने में कठिनाई हुई। इससे न्यायालय से जुड़े कई प्रशासनिक और कानूनी कार्य प्रभावित हुए। अदालत में पेश होने वाले अनेक मामलों की सुनवाई स्थगित करनी पड़ी, जिससे दूर-दराज से आए वादियों को निराश होकर लौटना पड़ा।
बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य न्यायिक व्यवस्था को बाधित करना नहीं, बल्कि अधिवक्ताओं के सम्मान और अधिकारों की रक्षा करना है। उन्होंने मांग की कि आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस आयुक्तालय के वरिष्ठ अधिकारी स्वयं हस्तक्षेप करें, पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा करें और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाएं।
आंदोलन में वरिष्ठ अधिवक्ता शेखर कुंडू, बानी मंडल सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता शामिल रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होती, तब तक आंदोलन की रणनीति पर विचार जारी रहेगा।
दिनभर चले इस विरोध प्रदर्शन के कारण अदालत परिसर में सामान्य गतिविधियां प्रभावित रहीं। कई मुकदमों की सुनवाई टल गई, जबकि न्याय की उम्मीद लेकर पहुंचे लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ा। अब सभी की निगाहें पुलिस प्रशासन और बार एसोसिएशन के बीच संभावित वार्ता पर टिकी हैं, जिससे इस विवाद का समाधान निकल सके और न्यायालय का सामान्य कामकाज फिर से सुचारु रूप से शुरू हो सके।

















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