

आसनसोल : भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं आसनसोल नगर निगम के पूर्व मेयर जितेन्द्र तिवारी ने मंगलवार को अपने गोधूली स्थित आवासीय कार्यालय में आयोजित पत्रकार सम्मेलन के माध्यम से राज्य सरकार की धार्मिक नीति पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा किया। उन्होंने दीघा में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा जगन्नाथ मंदिर के सरकारी खर्चे पर उद्घाटन को लेकर नीतिगत विसंगति की ओर ध्यान आकृष्ट किया।
जितेंद्र तिवारी ने कहा कि मंदिर का उद्घाटन एक सांस्कृतिक महत्त्व की घटना है और इसमें भाग लेना हर नागरिक का अधिकार है। किंतु, उन्होंने टीएमसी नेतृत्व पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब वे नगर निगम के मेयर थे, उस समय रथ यात्रा आयोजन हेतु स्थानीय रथ पूजा समितियों को ₹25,000 का वार्षिक अनुदान दिया जाता था। परंतु, उनके पद से हटते ही यह अनुदान “सरकारी धन का धार्मिक उपयोग अनुचित है” कहकर बंद कर दिया गया।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब नगर निगम द्वारा धार्मिक आयोजन में सहायता देना गलत ठहराया गया, तो फिर सरकारी कोष से दीघा में भव्य मंदिर निर्माण एवं उसका उद्घाटन समारोह कैसे उचित हो सकता है? तिवारी ने इसे राजनीतिक दोहरापन करार देते हुए कहा कि यदि रथ यात्रा को आर्थिक सहयोग देना अनुचित था, तो टीएमसी नेताओं को राज्य के खर्चे पर मंदिर उद्घाटन में भाग लेने का नैतिक अधिकार नहीं है।

तिवारी ने कहा कि 2020 में अंतिम बार लगभग 45 रथ पूजा समितियों को ₹25,000 की सहायता राशि प्रदान की गई थी। उसके बाद से यह परंपरा राजनीतिक दुर्भावना के चलते बंद कर दी गई। उन्होंने मांग की कि जो अधिकारी या नेता इस अनुदान को बंद करने के लिए उत्तरदायी हैं, उन्हें रथ पूजा समितियों से सार्वजनिक क्षमा याचना करनी चाहिए।

पूर्व मेयर ने राज्य सरकार से स्पष्ट किया कि धार्मिक आयोजन के प्रति नीति स्पष्ट और निष्पक्ष होनी चाहिए। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि सरकार भेदभावपूर्ण नीति पर कायम रही, तो जनता और धार्मिक संगठनों का आक्रोश भविष्य में आंदोलन का रूप ले सकता है।
इस मुद्दे पर टीएमसी नेतृत्व की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।














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