आसनसोल ; तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी की विदेश जाकर आंखों का उपचार कराने संबंधी अर्जी पर कलकत्ता उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। न्यायालय ने फिलहाल विदेश में उपचार कराने की अनुमति देने से इनकार करते हुए उन्हें एसएसकेएम अस्पताल में चिकित्सकीय जांच कराने का निर्देश दिया है। जांच की रिपोर्ट सात अगस्त को न्यायालय में प्रस्तुत करने को कहा गया है।
न्यायालय के इस आदेश पर राज्य की नगर एवं शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पाल ने प्रतिक्रिया देते हुए फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने पहले राज्य के अस्पताल में चिकित्सकीय जांच कराने का निर्देश देकर एक महत्वपूर्ण व्यवस्था कायम की है।
मंत्री ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठाए सवाल
अग्निमित्रा पाल ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में राज्य सरकार की ओर से स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और विभिन्न योजनाओं को लेकर कई दावे किए गए हैं।
मंत्री ने स्वास्थ्य साथी योजना और राज्य के विभिन्न अस्पतालों में किए गए विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि यदि राज्य में बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होने का दावा किया जाता है तो किसी जनप्रतिनिधि को उपचार के लिए विदेश जाने की आवश्यकता क्यों महसूस हो रही है।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में बड़ी आबादी सरकारी और निजी अस्पतालों में उपचार कराती है। ऐसे में राज्य की चिकित्सा व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
अस्पतालों की व्यवस्थाओं पर कटाक्ष
अग्निमित्रा पाल ने आरोप लगाया कि राज्य के कई सरकारी अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं की कमी है। उन्होंने चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की कमी तथा अस्पतालों में बिस्तरों की उपलब्धता से जुड़ी समस्याओं का भी उल्लेख किया।
उनका आरोप है कि कई स्थानों पर मरीजों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। हालांकि, मंत्री द्वारा लगाए गए इन राजनीतिक आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस खबर के माध्यम से नहीं की गई है।
‘राज्य में ही इलाज कराएं’
मंत्री ने कहा कि यदि राज्य सरकार पश्चिम बंगाल में बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था का दावा करती है तो उसे आम लोगों के साथ-साथ सभी जनप्रतिनिधियों को भी राज्य की चिकित्सा सुविधाओं पर भरोसा दिलाना चाहिए।
उन्होंने राजनीतिक कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि अभिषेक बनर्जी राज्य में ही उपचार कराते हैं तो सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं और चिकित्सा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति भी सामने आएगी। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं का उपयोग किया जाना चाहिए।
सात अगस्त को रिपोर्ट पर नजर
अदालत के निर्देश के बाद अब एसएसकेएम अस्पताल में होने वाली चिकित्सकीय जांच और उसकी रिपोर्ट महत्वपूर्ण हो गई है। सात अगस्त को रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जानी है। इसके बाद न्यायालय आगे की स्थिति पर निर्णय ले सकता है।
अभिषेक बनर्जी की विदेश में उपचार संबंधी अर्जी और अदालत के निर्देश ने एक बार फिर पश्चिम बंगाल की स्वास्थ्य व्यवस्था को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। एक ओर न्यायालय का निर्देश चिकित्सकीय जांच की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर विपक्षी नेता इसे राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल उठाने के अवसर के रूप में देख रहे हैं।
















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