दुर्गापुर : हॉकी के महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद की जयंती के अवसर पर मनाए जाने वाले राष्ट्रीय खेल दिवस को इस बार दुर्गापुर में व्यापक स्तर पर आयोजित करने की तैयारी है। खेल को केवल एक दिन के आयोजन तक सीमित रखने के बजाय इसे शहर की खेल प्रतिभाओं को मंच देने और नई पीढ़ी को खेलों से जोड़ने के अभियान के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई है।
राष्ट्रीय खेल दिवस आयोजन समिति की ओर से शुक्रवार को मंगलिक थिएटर में पत्रकार वार्ता आयोजित कर कार्यक्रम की रूपरेखा साझा की गई। समिति की संयोजक सीमा दत्ता चटर्जी ने बताया कि 22 अगस्त को दोपहर दो बजे सिद्धू-कानू स्टेडियम से खेल जागरूकता जुलूस निकाला जाएगा। पश्चिम बंगाल सरकार के खेल मंत्री इंद्रनील खान इसमें शामिल होंगे।
खेल प्रतिभाओं को मिलेगा मंच
आयोजन समिति के अनुसार, जुलूस का उद्देश्य दुर्गापुर की खेल परंपरा और यहां के खिलाड़ियों की उपलब्धियों को सामने लाना है। शहर के विभिन्न हिस्सों से गुजरने वाला यह जुलूस लोगों को राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाले मुख्य कार्यक्रम में शामिल होने के लिए भी प्रेरित करेगा।
समिति के मुताबिक, 29 अगस्त को सुबह छह बजे सिद्धू-कानू स्टेडियम से शहीद भगत सिंह स्टेडियम तक रंगारंग खेल जुलूस निकाला जाएगा। इसमें बच्चों से लेकर विभिन्न आयु वर्ग के खिलाड़ी और खेलप्रेमी शामिल होंगे।
इसके बाद शहीद भगत सिंह स्टेडियम में खेल प्रदर्शन और अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसमें दुर्गापुर के विभिन्न खेलों से जुड़े करीब 53 खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।
औद्योगिक शहर से खेल नगरी बनाने का लक्ष्य
सीमा दत्ता चटर्जी ने कहा कि दुर्गापुर की पहचान लंबे समय से औद्योगिक शहर के रूप में रही है, लेकिन खेल के क्षेत्र में भी शहर की उपलब्धियां कम नहीं हैं। यहां के कई खिलाड़ियों ने राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है।
उन्होंने कहा कि आयोजन का उद्देश्य केवल राष्ट्रीय खेल दिवस मनाना नहीं, बल्कि दुर्गापुर में वर्षभर खेल का वातावरण तैयार करना है। इसके तहत बच्चों और युवाओं को खेलों से जोड़ने, उभरती प्रतिभाओं की पहचान करने और उन्हें उचित मंच उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा।
एक मंच पर आएंगे खेल से जुड़े लोग
आयोजकों की योजना विभिन्न खेल संगठनों, विद्यालयों, खेल अकादमियों, प्रशिक्षकों, निर्णायकों, खेल प्रबंधकों और खिलाड़ियों को एक साझा मंच पर लाने की है। इससे शहर में खेल गतिविधियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होने की उम्मीद है।
समिति का मानना है कि नियमित खेल गतिविधियों से बच्चों में अनुशासन, स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का विकास होगा। साथ ही प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के अवसर भी मिलेंगे।
हर वर्ष भव्य आयोजन का संकल्प
आयोजन समिति ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय खेल दिवस को केवल औपचारिक कार्यक्रम बनाकर समाप्त करने के बजाय इसे दुर्गापुर की वार्षिक खेल परंपरा के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा।
समिति ने शहर के उद्योगपतियों, खेल संगठनों, विद्यालयों, अभिभावकों और आम नागरिकों से इस अभियान में सहयोग की अपील की है। आयोजकों का कहना है कि सामूहिक प्रयास से दुर्गापुर को भविष्य में देश के महत्वपूर्ण खेल नगरों में पहचान दिलाई जा सकती है।
आयोजन समिति का संदेश स्पष्ट है—दुर्गापुर केवल उद्योगों के लिए नहीं, खेल प्रतिभाओं के लिए भी पहचाना जाए। इसी संकल्प के साथ राष्ट्रीय खेल दिवस 2026 को शहर में व्यापक रूप देने की तैयारी चल रही है।

















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