आसनसोल : त्योहारों के मौसम से पहले देशभर के मोबाइल उपभोक्ताओं के लिए दूरसंचार सेवाओं से जुड़ी एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। निजी क्षेत्र की प्रमुख दूरसंचार कंपनियां रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया अपने प्रीपेड तथा पोस्टपेड मोबाइल शुल्क में बढ़ोतरी कर सकती हैं। यदि प्रस्तावित वृद्धि लागू होती है तो मोबाइल उपयोगकर्ताओं को वर्तमान की तुलना में अधिक राशि खर्च करनी पड़ सकती है।
वित्तीय संस्था सेंटरम इंडिया के वरिष्ठ उपाध्यक्ष पीयूष पांडे के अगस्त के अंतिम सप्ताह में दिए गए अनुमान के अनुसार, आगामी चार से छह महीनों के दौरान मोबाइल दूरसंचार शुल्क में लगभग 12 प्रतिशत तक की वृद्धि संभव है। हालांकि, यह किसी कंपनी की ओर से घोषित नई दर नहीं है, बल्कि बाजार संबंधी आकलन बताया गया है। इसलिए अंतिम वृद्धि कितनी होगी और कब से लागू होगी, यह संबंधित कंपनियों के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।
प्रीपेड और पोस्टपेड दोनों पर असर की संभावना
संभावित शुल्क वृद्धि का प्रभाव केवल प्रीपेड उपभोक्ताओं तक सीमित रहने की आशंका नहीं है। पोस्टपेड ग्राहकों के मासिक बिल पर भी इसका असर पड़ सकता है। कंपनियां अपनी-अपनी योजनाओं के अनुसार अलग-अलग दर निर्धारित कर सकती हैं। ऐसे में किसी कंपनी के शुल्क में 10 प्रतिशत, तो किसी अन्य कंपनी के शुल्क में 11 या 12 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी होने की संभावना जताई जा रही है।
यदि किसी उपभोक्ता का वर्तमान मासिक रिचार्ज 500 रुपए है और उस पर 12 प्रतिशत की वृद्धि लागू होती है, तो उसे लगभग 60 रुपए अतिरिक्त देने होंगे। इसी तरह 1,000 रुपए की योजना पर करीब 120 रुपए अधिक खर्च हो सकते हैं। हालांकि वास्तविक राशि संबंधित कंपनी की नई मूल्य-सूची और योजना के आधार पर तय होगी।
जुलाई 2024 में हुई थी बड़ी बढ़ोतरी
देश की निजी दूरसंचार कंपनियों ने इससे पहले जुलाई 2024 में मोबाइल शुल्क में व्यापक वृद्धि की थी। उस समय विभिन्न कंपनियों ने अपने अनेक प्रीपेड और पोस्टपेड योजनाओं की कीमतों में बदलाव किया था। इसके बाद से मोबाइल और इंटरनेट सेवाओं पर होने वाला मासिक खर्च उपभोक्ताओं के लिए लगातार चर्चा का विषय रहा है।
अब संभावित नई वृद्धि की खबर ऐसे समय सामने आई है, जब त्योहारी मौसम में परिवारों का खर्च पहले से बढ़ जाता है। मोबाइल रिचार्ज, इंटरनेट और अन्य डिजिटल सेवाएं अब दैनिक जीवन का आवश्यक हिस्सा बन चुकी हैं। इसलिए शुल्क में मामूली वृद्धि का असर भी बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं के मासिक बजट पर पड़ सकता है।
सरकारी कंपनी की रणनीति पर नजर
दूरसंचार क्षेत्र में सार्वजनिक क्षेत्र की भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) की भूमिका भी इस घटनाक्रम में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। निजी कंपनियों की संभावित शुल्क वृद्धि के बीच बीएसएनएल अपनी मौजूदा योजनाओं और दरों को लेकर क्या निर्णय लेगा, इस पर उपभोक्ताओं की नजर रहेगी।
यदि निजी कंपनियां शुल्क बढ़ाती हैं और बीएसएनएल अपनी दरों में तत्काल बड़ा बदलाव नहीं करता है, तो कीमत के प्रति संवेदनशील ग्राहकों के बीच योजनाओं की तुलना बढ़ सकती है। हालांकि, बीएसएनएल की आगामी रणनीति को लेकर फिलहाल स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
उपभोक्ताओं को घोषणा का इंतजार
फिलहाल जियो, एयरटेल और वोडाफोन आइडिया की ओर से 12 प्रतिशत शुल्क वृद्धि को लेकर कोई अंतिम नई दर घोषित नहीं की गई है। इसलिए उपभोक्ताओं को आधिकारिक घोषणा तक वर्तमान योजनाओं पर ही निर्भर रहना होगा।
दूरसंचार कंपनियों की ओर से यदि नई दरें लागू की जाती हैं तो प्रीपेड रिचार्ज और पोस्टपेड बिल दोनों पर उसका सीधा असर दिखाई देगा। ऐसे में आगामी महीनों में मोबाइल उपभोक्ताओं की नजर कंपनियों की नई मूल्य-सूची पर रहेगी। त्योहारों से पहले यदि शुल्क बढ़ता है, तो परिवारों के नियमित संचार खर्च में भी अतिरिक्त बोझ जुड़ने की संभावना है।

















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