आसनसोल : पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव प्रसेनजीत पुइतांडी और अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय जनता युवा मोर्चा के आसनसोल संगठनात्मक जिला अध्यक्ष अभिक कुमार मंडल ने गुरुवार को आसनसोल दक्षिण थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नौ सितंबर की शाम प्रदर्शन के दौरान भगवान हनुमान की छवि वाले पोस्टर को जूते-चप्पलों से मारा और लात मारी गई। शिकायतकर्ता ने इसे धार्मिक भावनाओं को आहत करने तथा सार्वजनिक शांति प्रभावित करने वाला कृत्य बताया है।
शिकायत के अनुसार, घटना बुधवार शाम करीब छह से साढ़े छह बजे के बीच आसनसोल दक्षिण थाना परिसर के बाहर हुई। मंडल का दावा है कि प्रदर्शन के दौरान प्रसेनजीत पुइतांडी के साथ कई अन्य लोग भी मौजूद थे। आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन में एक पोस्टर प्रदर्शित किया गया, जिसमें बागेश्वर धाम से जुड़े धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की तस्वीर के साथ भगवान हनुमान की छवि वाला लॉकेट भी दिखाई दे रहा था।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि उक्त पोस्टर के उस हिस्से पर भी जूते-चप्पलों से प्रहार किया गया, जहां हनुमान की छवि बनी थी। मंडल ने पुलिस से पूरे घटनाक्रम की सीसीटीवी फुटेज और उपलब्ध वीडियो रिकॉर्डिंग की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि घटना का वास्तविक स्वरूप जांच और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के परीक्षण के बाद स्पष्ट होगा।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के कथित बयान को लेकर असहमति या आलोचना करना लोकतांत्रिक अधिकार है। शिकायतकर्ता ने कहा कि किसी सार्वजनिक व्यक्ति के बयान का विरोध शांतिपूर्ण तरीके से किया जा सकता है, लेकिन धार्मिक प्रतीकों के अपमान का आरोप गंभीर विषय है।
भाजयुमो नेता ने पुलिस से नौ सितंबर की शाम के दौरान आसनसोल दक्षिण थाने के बाहर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने की मांग की है। साथ ही प्रदर्शन में शामिल लोगों की पहचान, उनके कथित बयान और नारों की जांच करने का अनुरोध किया गया है।
शिकायत में इलेक्ट्रॉनिक सामग्री, वीडियो, तस्वीरों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की तकनीकी जांच कराने की भी मांग की गई है। मंडल ने कहा कि यदि जांच में किसी व्यक्ति की संलिप्तता प्रमाणित होती है तो उसके विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि शिकायत किसी धार्मिक समुदाय के विरुद्ध नहीं है और न ही शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को रोकने के उद्देश्य से की गई है। उनका कहना है कि कार्रवाई केवल उन लोगों के खिलाफ होनी चाहिए, जिनकी भूमिका जांच में सामने आए।
मामले में पुलिस की ओर से जांच के बाद ही आरोपों की सत्यता और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट होगी। फिलहाल शिकायतकर्ता ने प्राथमिकी दर्ज करने, साक्ष्य सुरक्षित रखने और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

















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