आसनसोल : आसनसोल दक्षिण थाना क्षेत्र के मोहितला कॉलोनी निवासी अरूप मुखर्जी ने सामाजिक माध्यम पर कथित रूप से जान से मारने की धमकी मिलने का आरोप लगाते हुए पुलिस से शिकायत की है। शिकायतकर्ता के अनुसार, उनकी हालिया रिहाई से संबंधित एक समाचार सामग्री के फेसबुक टिप्पणी खंड में एक खाते से कथित धमकी दी गई। मामले को गंभीर बताते हुए उन्होंने अपनी और परिवार की सुरक्षा को लेकर पुलिस से जांच तथा आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।

बताया गया है कि अरूप मुखर्जी हाल में कांग्रेस की ओर से आयोजित एक प्रदर्शन में शामिल हुए थे। यह प्रदर्शन बागेश्वर बाबा की ओर से बंगाली संस्कृति, खान-पान और बंगाली समुदाय के संबंध में कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के विरोध में आयोजित किया गया था। इसी प्रदर्शन से जुड़े मामले में पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था। बाद में करीब चार दिन सुधार गृह में रहने के बाद न्यायिक प्रक्रिया के तहत उन्हें जमानत मिल गई थी।
रिहाई की खबर पर कथित धमकी
जमानत पर रिहा होने के बाद अरूप मुखर्जी की जेल से बाहर आने संबंधी खबर एक समाचार माध्यम के आधिकारिक फेसबुक पृष्ठ पर प्रकाशित की गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसी पोस्ट के टिप्पणी खंड में ‘शोषण कुमार हिंदू’ नाम के फेसबुक खाते से उनके खिलाफ कथित रूप से धमकी भरी टिप्पणी की गई।
अरूप मुखर्जी ने पुलिस को बताया कि टिप्पणी में उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई, जिससे वह और उनका परिवार चिंतित हैं। इसके बाद उन्होंने मामले को केवल सामाजिक माध्यम पर हुई टिप्पणी मानकर छोड़ने के बजाय आसनसोल दक्षिण थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराने का निर्णय लिया।
डिजिटल साक्ष्य पुलिस को सौंपे
शिकायत के साथ कथित टिप्पणी से संबंधित डिजिटल सामग्री भी पुलिस को उपलब्ध कराने की बात कही गई है। इसमें समाचार पोस्ट का लिंक, कथित धमकी वाली टिप्पणी का चित्र और संबंधित सामाजिक माध्यम सामग्री शामिल होने की जानकारी दी गई है।
ऐसे मामलों में पुलिस टिप्पणी के समय, खाते की गतिविधियों और उपलब्ध तकनीकी विवरणों की जांच कर सकती है। हालांकि, केवल फेसबुक खाते में दर्ज नाम के आधार पर उसके वास्तविक संचालक की पहचान सुनिश्चित नहीं की जा सकती। खाते के पीछे कौन व्यक्ति है, यह तकनीकी जांच और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं
फिलहाल अरूप मुखर्जी की शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित टिप्पणी वास्तव में किस खाते से की गई और उस खाते का संचालन कौन कर रहा था। इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति को धमकी देने का जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।
शिकायतकर्ता ने पुलिस से भारतीय न्याय संहिता तथा सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है। भारतीय न्याय संहिता की धारा 351 आपराधिक धमकी से संबंधित है। हालांकि, इस मामले में कौन-सी कानूनी धाराएं लागू होंगी, इसका निर्धारण पुलिस उपलब्ध तथ्यों और जांच के निष्कर्षों के आधार पर करेगी।
राजनीतिक विवाद से जुड़ी पृष्ठभूमि
पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि कांग्रेस के प्रदर्शन और उससे जुड़े मामले से जुड़ी है। अरूप मुखर्जी के अनुसार, वह बंगाली संस्कृति और समुदाय से संबंधित कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के विरोध में आयोजित प्रदर्शन में शामिल हुए थे। इसी मामले में उनकी गिरफ्तारी हुई और बाद में अदालत से जमानत मिलने पर वह बाहर आए।

अब उनकी रिहाई से संबंधित सामाजिक माध्यम पोस्ट पर कथित धमकी सामने आने के बाद मामला फिर चर्चा में है। शिकायतकर्ता ने कहा है कि सार्वजनिक मंच पर इस तरह की टिप्पणी से सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा होना स्वाभाविक है।
सामाजिक माध्यमों पर राजनीतिक और सामाजिक विषयों को लेकर तीखी बहस होती रहती है। हालांकि, असहमति और आलोचना के बीच किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचाने की कथित धमकी एक अलग कानूनी विषय बन सकती है। इसी कारण शिकायतकर्ता ने पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
अब पुलिस द्वारा उपलब्ध कराए गए डिजिटल साक्ष्यों की जांच के बाद आगे की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। जांच में कथित खाते के संचालन, टिप्पणी की वास्तविकता और उसके पीछे मौजूद व्यक्ति की पहचान जैसे पहलुओं पर ध्यान दिया जा सकता है। फिलहाल शिकायत दर्ज होने के बाद मामले में पुलिस की कार्रवाई और जांच के निष्कर्ष पर सभी की नजर बनी हुई है।















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