

सांकतोड़िया : ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) को रेलवे रैक में कोयले की अंडरलोडिंग (निर्धारित न्यूनतम भार से कम कोयला भेजना) के चलते गत पांच वर्षों में कुल 205.78 करोड़ रुपये जुर्माने के रूप में रेलवे को चुकाने पड़े हैं। चालू वित्तीय वर्ष 2024-25 में ही कंपनी को 53.26 करोड़ रुपये का भारी-भरकम दंड देना पड़ा है, जो बीते वर्षों की तुलना में सर्वाधिक है। यह आंकड़ा न केवल चिंता का विषय है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि वर्षों से चली आ रही लापरवाही पर अभी तक कारगर नियंत्रण नहीं पाया गया है।

ईसीएल को लगातार भरना पड़ा जुर्माना
ईसीएल के आंतरिक आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2020-21 में 38.13 करोड़, वर्ष 2021-22 में 37.84 करोड़, वर्ष 2022-23 में 41.33 करोड़, और वर्ष 2023-24 में 35.32 करोड़ रुपये का जुर्माना रेलवे को अंडरलोडिंग के कारण देना पड़ा। यह आंकड़ा अब 2024-25 में बढ़कर 53.26 करोड़ पर पहुंच गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि कंपनी द्वारा अंडरलोडिंग पर रोक लगाने के प्रयास नाकाफी साबित हुए हैं।
प्रबंधन के प्रयास हुए विफल
हालांकि, ईसीएल प्रबंधन ने बढ़ते जुर्माने को देखते हुए ‘मिशन अंडरलोडिंग मिनिमाइजेशन’ नामक पहल की शुरुआत की थी, जिसके तहत सभी एरिया प्रबंधन और बिक्री एवं विपणन विभाग के अधिकारियों को अंडरलोडिंग रोकने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। लेकिन धरातल पर इन निर्देशों का असर नहीं दिखा, क्योंकि जुर्माने की राशि में कमी के बजाय लगातार वृद्धि ही देखी जा रही है।

घाटे के पीछे की प्रमुख वजहें
एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अंडरलोडिंग के पीछे कई अहम कारण जिम्मेदार हैं 1. साइडिंग क्षेत्र में कोयले की पर्याप्त उपलब्धता का न होना।2. पे-लोडर मशीनों में वजन मापने की प्रणाली (वेटोमीटर) का अभाव।3. निजी कंपनियों या कांट्रैक्टर्स को जुर्माने की राशि से बचाने की प्रवृत्ति।4. दोषी ऑपरेटरों और अधिकारियों से वसूली न करना।उन्होंने यह भी कहा कि जब तक संबंधित अधिकारियों और ऑपरेटरों की जवाबदेही तय नहीं की जाएगी, तब तक ऐसी स्थिति में सुधार संभव नहीं है।
श्रम संगठनों का तीखा प्रहार
इस मुद्दे को लेकर श्रम संगठनों ने ईसीएल प्रबंधन को आड़े हाथों लिया है। उनका आरोप है कि जब एक बार जुर्माना लग चुका था, तो प्रबंधन को अगले वर्षों में सतर्क रहना चाहिए था। लेकिन लापरवाही और जवाबदेही के अभाव में यह नुकसान लगातार बढ़ता गया। श्रमिक संगठनों ने ईसीएल के सीएमडी से मांग की है कि वे इस मामले में कड़ा रुख अपनाएं और क्षेत्रीय बिक्री अधिकारियों तथा दोषी ठेकेदारों पर कार्रवाई करें।

समाधान की दिशा में ठोस कदम अपेक्षित
अंडरलोडिंग के कारण हो रहे आर्थिक नुकसान को देखते हुए अब समय आ गया है कि ईसीएल प्रबंधन सिर्फ आदेश जारी करने के बजाय सख्त कार्रवाई करे। यदि समय रहते दोषियों पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह नुकसान कंपनी के साथ-साथ सरकार और करदाताओं पर भी आर्थिक भार बनकर सामने आएगा।














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