

जामुड़िया : औद्योगिक क्षेत्र में भूमि कब्जे के आरोपों की कड़ी में अब जामुड़िया के एक प्रमुख इस्पात संयंत्र मान स्टील का नाम सामने आया है। स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि मान स्टील ने रेलवे, एडीडीए और कृषि योग्य भूमि पर कब्जा कर लिया है। इस सिलसिले में स्थानीय निवासियों ने जामुड़िया थाना में सामूहिक रूप से ज्ञापन सौंपते हुए शिकायत दर्ज कराई। ज्ञापन में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि संयंत्र प्रबंधन ने उनकी कृषि योग्य भूमि पर कब्जा कर लिया, जिससे उनकी आजीविका पर संकट उत्पन्न हो गया है।

कृषि योग्य भूमि पर कब्जा का आरोप
स्थानीय निवासी निरंजन मंडल ने इस मामले में गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि 15 वर्ष पहले तक वे इस भूमि पर धान और अन्य साग-सब्जियों की खेती करते थे, जिससे उनका परिवार पल रहा था। लेकिन अब इस भूमि पर मान स्टील के कारखाने ने कब्जा कर लिया है। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने शिकायत की, तो प्रबंधन ने उन्हें मुआवजा देने का वादा किया, लेकिन अब तक न तो मुआवजा दिया गया है और न ही उनकी कृषि योग्य भूमि का कब्जा हटाया गया है। निरंजन मंडल ने कहा कि अब वे प्रशासन का दरवाजा खटखटा रहे हैं और जामुड़िया थाना में अपनी शिकायत दर्ज कराई है।
एडीडीए की सड़क पर भी आरोप
मान स्टील पर एक और गंभीर आरोप यह है कि उसने आसनसोल दुर्गापुर विकास प्राधिकरण (एडीडीए) द्वारा बनाई गई सड़क का अतिक्रमण कर लिया है। आरोप है कि इस सड़क को अपने कारखाने में समाहित कर लिया है। हालांकि मान स्टील प्रबंधन ने इस मामले पर अपनी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। भाजपा नेता संतोष सिंह ने इस मुद्दे पर बयान देते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस के नेताओं और विधायक की मिलीभगत से जामुड़िया में सरकारी जमीन की लूट की जा रही है। उन्होंने बताया कि श्यामसेल, सुपर स्मेल्टर, और अन्य उद्योगों ने भी सरकारी जमीन पर कब्जा किया है और गिरधन मेटालिक ने तो एडीडीए की सड़क तक का अतिक्रमण कर लिया है। यहां तक कि इस सड़क पर पार्किंग की व्यवस्था भी बना दी गई है और एडीडीए की जमीन पर गेस्ट हाउस का निर्माण कर दिया गया है।

स्थानीय नेताओं की आलोचना
इस घटनाक्रम ने जामुड़िया के स्थानीय लोगों को गुस्से में डाल दिया है। उनका कहना है कि कारखाने के प्रबंधन और स्थानीय नेताओं के बीच मिलीभगत के कारण उनकी ज़मीन पर कब्जा किया जा रहा है। भाजपा नेता संतोष सिंह ने यह भी कहा कि यह सब तृणमूल कांग्रेस के नेताओं की शह पर हो रहा है, जिन्होंने इस भूमि हड़पने की प्रक्रिया में सीधे मदद की है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह जमीन लूट की पूरी योजना सरकार और कारखाना प्रबंधन के बीच एक गहरे गठबंधन का नतीजा है।
ग्रामीणों की मांग
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की है और कहा है कि उनकी भूमि का कब्जा तत्काल हटाया जाए और मुआवजा दिया जाए। इस मुद्दे पर प्रशासन की प्रतिक्रिया का अब तक कोई संकेत नहीं मिला है, लेकिन ग्रामीणों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। उन्हें उम्मीद है कि उनकी शिकायतों पर जल्द कार्यवाही होगी और उनके हक की ज़मीन वापस मिलेगी।















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