
दुर्गापुर : पश्चिम बर्धमान जिले के दुर्गापुर स्थित सिटी सेंटर के सेल को-ऑपरेटिव के 60 नंबर मधुसूदन पथ में रविवार प्रातः एक वृद्ध पुरुष का मृत शरीर उनके ही घर की बारादरी से बरामद किया गया। मृतक की पहचान 81 वर्षीय श्री सुबोध रंजन आचार्य के रूप में हुई है, जो मिश्र इस्पात कारखाना के सेवानिवृत्त कर्मचारी थे।
स्थानीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, वे विगत कई वर्षों से एकाकी जीवन व्यतीत कर रहे थे और दीर्घकालीन अस्वस्थता से ग्रसित थे। उनके इकलौते पुत्र भारतीय रेलवे में कार्यरत हैं और कोलकाता के बाली क्षेत्र में एक आलीशान फ्लैट में निवास करते हैं, किंतु उन्होंने अपने वृद्ध पिता की कोई खोज-खबर नहीं ली।

रविवार को जब उनके घर की बारादरी से शरीर की दुर्गंध फैलने लगी, तब पड़ोसियों ने पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर दुर्गापुर महकमा अस्पताल भेज दिया, जहाँ मृतदेह का चिकित्सीय परीक्षण (पोस्टमार्टम) कराया जाएगा। पुलिस के अनुसार, परीक्षण की रिपोर्ट आने के पश्चात ही मृत्यु का वास्तविक कारण ज्ञात हो सकेगा।

स्थानीय गृह परिचारिका अर्चना घोषाल ने मीडिया से बात करते हुए बताया, “सुबोध बाबू कभी-कभी भूखे सोते थे, कभी पूरी रात रोते रहते थे। कई बार अस्पताल भी ले जाया गया था। अंतिम दिनों में वे अपने घर की बारादरी में ही लेटे रहते थे, जिसके लिए हमने लक्ष्मणरेखा खींच दी थी ताकि वे गिर न जाएं। बार-बार उनके पुत्र को सूचित किया गया, किंतु उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। शनिवार रात्रि को भी अंतिम बार फोन किया गया था।”

पड़ोसियों का यह भी कहना है कि उन्होंने ही वृद्ध की सेवा-शुश्रूषा की। इस ह्रदय विदारक घटना ने समाज में व्याप्त पारिवारिक उपेक्षा, आत्मकेंद्रित जीवनशैली एवं वृद्धजनों के प्रति संवेदनहीनता पर गहन प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। यह प्रसंग न केवल एक मानव की मृत्यु है, बल्कि सामाजिक दायित्वहीनता का मूक प्रमाण भी है।














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