
पांडवेश्वर : स्वास्थ्य सुविधाओं के उन्नयन हेतु लाखों रुपये की सरकारी योजनाएं जहाँ कागजों पर विकसित दिखाई देती हैं, वहीं ज़मीनी सच्चाई कुछ और ही दृष्टिगत होती है। पांडवेश्वर अंचल स्थित इच्छापुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की दुर्दशा इसी कड़वे सत्य का ज्वलंत प्रमाण है।

पांडवेश्वर के पूर्व विधायक एवं जनप्रतिनिधि श्री जीतेंद्र तिवारी ने उक्त स्वास्थ्य केंद्र की अत्यंत दयनीय एवं अस्वच्छ स्थिति की कुछ यथार्थपरक छवियाँ समाजमाध्यमों (सोशल मीडिया) पर साझा करते हुए जनस्वास्थ्य तंत्र की विफलता पर तीव्र कटाक्ष किया है। उन्होंने प्रश्न उठाया कि जहाँ केंद्र व राज्य सरकारें स्वास्थ्य के क्षेत्र में सतत सुधार के दावे करती हैं, वहीं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की यह स्थिति क्या उन दावों का उपहास नहीं करती?

स्वास्थ्य केंद्र के प्रांगण में फैली गंदगी, जर्जर भवन, टूटी खिड़कियाँ, और समुचित चिकित्सकीय संसाधनों की अनुपलब्धता – ये सभी जनसरोकारों के प्रति शासन की असंवेदनशीलता को उजागर करते हैं। ग्रामीण जनों के अनुसार, लंबे समय से इस केंद्र में चिकित्सकों की अनुपस्थिति, स्वच्छता की घोर उपेक्षा और समयबद्ध सेवाओं का अभाव व्याप्त है, जिससे आमजन को निजी चिकित्सालयों पर निर्भर रहना पड़ता है।

पूर्व विधायक तिवारी ने प्रशासन से यह मांग की है कि स्वास्थ्य केंद्र की दशा पर शीघ्र संज्ञान लेकर त्वरित सुधारात्मक कदम उठाए जाएँ, अन्यथा जनाक्रोश को स्वर देना अनिवार्य हो जाएगा।

यह प्रसंग न केवल इच्छापुर की पीड़ा का प्रतिनिधित्व करता है, अपितु सम्पूर्ण ग्रामीण स्वास्थ्य तंत्र पर भी एक गहन आत्ममंथन की आवश्यकता को रेखांकित करता है। अब देखना यह है कि यह जनजागरण प्रशासन को झकझोर पाता है या फिर यह भी अन्य लोकलुभावन बयानों की भाँति विस्मृति के गर्त में चला जाएगा।














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