
आसनसोल : जामुड़िया के निर्घा एरोड्रम का ऐतिहासिक महत्व द्वितीय विश्व युद्ध और 1971 के युद्ध के दौरान बेहद महत्वपूर्ण रहा है। यह स्थल कभी भारतीय वायुसेना के विमानों के लिए उड़ान भरने और उतरने का केंद्र था। हालांकि आज यह एरोड्रम अपने खोए हुए इतिहास के विपरीत पूरी तरह उपेक्षित और जर्जर स्थिति में है। निर्घा एरोड्रम की जमीन का एक बड़ा हिस्सा गैरकानूनी रूप से कब्जा लिया गया है। यहां होटल, गाड़ी धोने के गेराज, मकान आदि बन गए हैं। स्थानीय लोग इस स्थिति से परेशान हैं और प्रशासन की चुप्पी पर सवाल उठा रहे हैं। हाल ही में आसनसोल के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने केंद्रीय नागरिक विमानन मंत्रालय को पत्र लिखकर इस एरोड्रम को पुनः सक्रिय करके नया हवाई अड्डा बनाने की मांग की है, लेकिन अभी तक कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला है।
साउथ बंगाल चैंबर ऑफ कॉमर्स के महासचिव और जमुड़िया निवासी अजय खैतान ने कहा कि इस क्षेत्र में लगभग 600 से 700 एकड़ जमीन है, जिसे नए हवाई अड्डे या हेलिपैड के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। यदि केंद्र सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं देती है, तो कम से कम यहां सेना के स्कूल, अस्पताल या शिविर की स्थापना की जानी चाहिए। उनका कहना है कि यदि इस जमीन पर हो रही अवैध कब्जेदारी को नहीं रोका गया, तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाएगी।

स्थानीय लोगों ने भी इस ऐतिहासिक स्थल की गैरकानूनी कब्जेदारी को स्वीकार नहीं किया है। कुछ समय पूर्व विरोध के कारण कब्जा कम हुआ था, लेकिन अब फिर से बढ़ गया है। वर्तमान में, रतिबाटी के पास कोयला खनन के ब्लास्टिंग कार्य से भी इस क्षेत्र को नुकसान पहुंच रहा है।
आसनसोल नगरपालिका के मेयर और तृणमूल नेता सुभ्रत अधिकारी ने कहा कि सांसद के प्रस्ताव का उन्हें पूरा समर्थन है। उन्होंने कहा कि अगर यहां हेलीकॉप्टर सेवा शुरू हो सके, तो यह क्षेत्र के लिए फायदेमंद होगा। जिला परिषद के अध्यक्ष विश्वनाथ बाउड़ी ने भी इस क्षेत्र की सुरक्षा और संरक्षण की बात कही है। भूमि विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि जमीन को लेकर उच्च न्यायालय में भी मामले चल रहे हैं।

स्थानीय कुछ लोग बताते हैं कि युद्ध के समय उन्होंने जमीन सेना को दी थी, लेकिन कोई मुआवजा नहीं मिला। निर्घा एरोड्रम को पुनर्जीवित करने के लिए केंद्रीय नागरिक विमानन मंत्रालय की जल्द पहल की उम्मीद की जा रही है।














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