
रानीगंज : रानीगंज के तिराट गांव में धर्मराज ठाकुर की वार्षिक पूजा के अवसर पर अद्वितीय श्रद्धा और आस्था का दृश्य देखने को मिला। धीवर पाड़ा स्थित धर्मराज मंदिर में आयोजित इस पूजा में गांव के तीन युवकों सहित 75 से अधिक श्रद्धालुओं ने कांटों की पीड़ा सहते हुए एक विशेष शोभायात्रा में भाग लिया।
भक्तों ने अपने शरीर के विभिन्न हिस्सों में कांटे चुभोकर कई किलोमीटर की पदयात्रा की, जबकि तीन युवाओं ने कमल के फूल के आकार की विशेष आकृति में, क्रेन की सहायता से 30 फीट ऊंचाई तक लटककर आस्था का अनूठा प्रदर्शन किया। यह दृश्य देखते ही हजारों की संख्या में लोग उमड़ पड़े और धर्मराज की जयकारों से वातावरण गुंजायमान हो उठा।

पश्चिम बंगाल के राढ़ क्षेत्र में धर्मराज ठाकुर की पूजा सदियों से होती आ रही है। विशेष रूप से बैशाख, ज्येष्ठ और आषाढ़ माह में यह पूजा ग्रामीण क्षेत्रों में अत्यंत श्रद्धा के साथ मनाई जाती है। तिराट गांव की यह पूजा न केवल आस्था का प्रतीक बनी, बल्कि भक्तों के समर्पण और साहस का भी उदाहरण प्रस्तुत कर गई।

पूजा के अवसर पर गांव में एक भव्य मेले का आयोजन भी किया गया, जिसकी व्यवस्था स्थानीय उद्यमी खुशी साजो ने की। मेले में विभिन्न सामाजिक और वैज्ञानिक विषयों पर आधारित मॉडल प्रदर्शित किए गए। इनमें चंद्रयान-2, मोबाइल की लत, और भारत की एंटी मिसाइल प्रणाली से जुड़ी झांकियां विशेष आकर्षण रहीं।
इस रचनात्मक प्रदर्शनी में कुल पंद्रह प्रतिभागियों ने भाग लिया और समाज के विविध पहलुओं को आधुनिक परिधानों के माध्यम से प्रस्तुत किया। रात को एगारिया के प्रसिद्ध बाउल गायक भास्कर मंडल ने अपने संगीतमय बाउल गीतों से भक्तिमय वातावरण को और भी गहराई प्रदान की।

पूजा के समापन पर गांव के मध्य चरके यात्रा का आयोजन किया जाएगा, जिसमें श्रद्धालु चरके घुमाकर अपनी मनोकामनाएं व्यक्त करेंगे। तिराट गांव की इस वार्षिक धर्मराज पूजा ने इस वर्ष भी आस्था, परंपरा और समाजिक चेतना का एक अनुपम संगम प्रस्तुत किया।














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