
आसनसोल : आसनसोल नगर निगम के पीएनबी बाजार शाखा खाते से 40 लाख रुपये की फर्जी निकासी मामले में साइबर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मध्यप्रदेश के जबलपुर से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह घटना निगम के वित्तीय मामलों में गंभीर चूक और धोखाधड़ी की ओर इशारा करती है। गिरफ्तारी के बाद आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर आसनसोल लाया गया, जहां उन्हें अदालत में पेश कर 10 दिनों की रिमांड के लिए आवेदन किया गया है।

आसनसोल नगर निगम के वित्त अधिकारी अहमद कमाल रशीदी ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि निगम के खाते से फर्जी तरीके से 40 लाख रुपये निकाले गए। डीसीपी डॉ. अरविंद आनंद ने पुष्टि करते हुए बताया कि साइबर पुलिस ने जबलपुर से माधव सरावगी और प्रियांशु साहू नामक दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है। माधव जबलपुर का निवासी है, जबकि प्रियांशु छत्तीसगढ़ से है। दोनों आरोपियों को पांच दिनों की ट्रांजिट रिमांड पर आसनसोल लाया गया, जहां अदालत में उन्हें 10 दिनों की रिमांड के लिए आवेदन किया गया है।
निगम द्वारा दी गई शिकायत में कहा गया है कि जिस चेक के माध्यम से 40 लाख रुपये का भुगतान किया गया था, वह चेक निगम के लेखा विभाग में वर्ष 2022 से सुरक्षित रखा हुआ था। इसके बावजूद, बैंक ने बिना निगम की अनुमति और जानकारी के इस चेक का मोबाइल नंबर बदल दिया। इसके बाद बैंक ने बिना किसी पुष्टि के इस चेक के माध्यम से 40 लाख रुपये का भुगतान कर दिया। और तो और, बैंक ने एक और चेक तैयार किया था, जिससे 80 लाख रुपये की निकासी का प्रयास किया गया।

आसनसोल पुलिस अब दोनों आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस धोखाधड़ी में स्थानीय स्तर पर कौन लोग शामिल हो सकते हैं। यह मामला निगम के वित्तीय विभाग में न केवल अनियमितताओं का बल्कि बैंक की लापरवाही का भी प्रतीक बन गया है। बैंक के द्वारा किए गए इस गलत कदम ने निगम की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं और मामले की जांच में यह महत्वपूर्ण बिंदु बन गया है।
इस घटना को लेकर नगर निगम के अधिकारियों ने भी चिंता व्यक्त की है और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। नगर निगम के कुछ कर्मचारी यह मानते हैं कि इस तरह के वित्तीय धोखाधड़ी की घटनाओं के पीछे केवल एक या दो नहीं, बल्कि एक बड़ा नेटवर्क काम कर सकता है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी हुई है कि इस पूरी घटना में और कौन लोग शामिल हो सकते हैं और वे किस तरह से इस धोखाधड़ी को अंजाम देने में मदद कर रहे थे।
प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि यह धोखाधड़ी पूरी तरह से योजनाबद्ध थी और इसमें बैंक कर्मचारियों के साथ-साथ निगम के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत भी हो सकती है। पुलिस ने आरोपियों से कड़ी पूछताछ शुरू कर दी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि किस प्रकार इस जालसाजी को अंजाम दिया गया। इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आरोपियों को रिमांड पर लेकर मामले की गहन जांच शुरू कर दी है।
डीसीपी डॉ. अरविंद आनंद ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “यह एक गंभीर वित्तीय धोखाधड़ी का मामला है, और हम इसे हल्के में नहीं लेंगे। आरोपी फिलहाल रिमांड पर हैं और हम मामले की तह तक जाएंगे। यह घटना केवल निगम के लिए नहीं बल्कि बैंकिंग व्यवस्था के लिए भी एक बड़ा झटका है, इसलिए जांच पूरी तरह से पारदर्शी और सख्त होगी।”
इसके अलावा, इस घटना ने नगर निगम के कर्मचारियों और अन्य संबंधित अधिकारियों को भी सतर्क कर दिया है, और अब सुरक्षा प्रोटोकॉल और फाइनेंशियल चेकिंग सिस्टम को और भी कड़ा करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
अब देखना यह होगा कि पुलिस और जांच एजेंसियां इस मामले में किस हद तक आगे बढ़ती हैं और कौन से और चौंकाने वाले खुलासे होते हैं।















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