
आसनसोल : पश्चिम बर्दवान जिले के बाराबनी क्षेत्र के पूंछड़ा ग्राम पंचायत के केलाजोड़ा गांव में सोमवार रात वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने एक अवैध लकड़ी मिल में छापेमारी की। इस कार्रवाई में अधिकारियों ने मिल के भीतर बड़ी मात्रा में लकड़ी पाए, जिसके संबंध में मिल के मालिक, शेख असगर, कोई वैध कागजात प्रस्तुत नहीं कर पाए। इसके बाद वन विभाग ने उस अवैध लकड़ी को जब्त कर लिया।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, वन विभाग के अधिकारियों ने जब मिल का निरीक्षण किया तो उन्हें वहां भारी मात्रा में लकड़ी के बड़े-बड़े टुकड़े और लकड़ी के बुरादे मिले। यह सब अवैध रूप से संचालित मिल में था, जिसका कोई वैध दस्तावेज या अनुमति नहीं थी। मिल के मालिक, शेख असगर, जब अधिकारियों से पूछताछ के दौरान वैध कागजात नहीं दिखा पाए, तब वन विभाग ने इसे अवैध करार देते हुए उन लकड़ियों को जब्त कर लिया।
इस छापेमारी के बाद वन विभाग के अधिकारियों ने जब्त की गई लकड़ी को मिल के भीतर एक स्थान पर एकत्रित कर दिया। अधिकारियों ने मिल के कर्मचारियों को सूचित किया कि मंगलवार सुबह उन लकड़ियों को वन विभाग के दफ्तर भेजा जाएगा। इस पूरे घटनाक्रम से आसपास के क्षेत्र में सनसनी फैल गई, और लोग इस छापेमारी को लेकर चर्चा करने लगे।

गौरतलब है कि शेख असगर ने इस मिल को अन्य किसी व्यक्ति को लीज पर दिया हुआ था, जिससे यह घटना और भी गंभीर हो जाती है। वहीं, जब इस घटना की सूचना मिलने के बाद समाचार पत्रों के प्रतिनिधि मिल के पास पहुंचे और घटनास्थल की तस्वीरें लेने की कोशिश की, तो मिल के मालिक ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। हालांकि, इस मामले में शेख असगर ने किसी भी प्रकार की टिप्पणी देने से इनकार कर दिया।
इस संदर्भ में, वन विभाग के बाराबनी के सरिषाथलि बिट के अधिकारी सुमंत दास ने बताया कि मिल का लाइसेंस वैध था, और मिल के संचालन में कोई खामी नहीं थी। लेकिन जो लकड़ी पकड़ी गई है, उन पर वन विभाग का कोई निशान नहीं था, और यह लकड़ी निजी रूप से कटाई गई थी, जो कि पूरी तरह से अवैध है। इसलिए इसे जब्त किया गया। हालांकि, उन्होंने इस बात की पुष्टि नहीं की कि कितनी मात्रा में लकड़ी जब्त की गई, उनका कहना था कि इस आंकड़े का सही अंदाजा मापने के बाद ही लगाया जा सकता है।
वन विभाग की यह छापेमारी क्षेत्र में वन संरक्षण और अवैध लकड़ी व्यापार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के रूप में देखी जा रही है। यह कदम यह दर्शाता है कि वन विभाग किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगा और कानून का पालन करवाने के लिए कठोर कदम उठाएगा।















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