
आसनसोल : काजी नजरुल विश्वविद्यालय में वित्तीय अनियमितताओं को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। बुधवार को विश्वविद्यालय के शिक्षकों की नवगठित संगठन “काजी नजरुल विश्वविद्यालय शिक्षक संघ” ने रजिस्ट्रार को ज्ञापन सौंपकर विश्वविद्यालय की वित्तीय स्थिति पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की। ज्ञापन में बीते तीन वित्तीय वर्षों के खर्चों का विस्तृत विवरण सार्वजनिक करने की मांग की गई है।
संगठन के अध्यक्ष परिमलेन्दु बनर्जी ने बताया कि यह संघ पूरी तरह से गैर-राजनीतिक है और विश्वविद्यालय के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि शिक्षक समुदाय चाहता है कि विश्वविद्यालय में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। ज्ञापन में कुल 16 मांगें शामिल हैं, जिनमें प्रमुख मांगें हैं:1. पिछले तीन वित्तीय वर्षों के खर्चों पर श्वेत पत्र जारी करना।2. उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार मान्य अधिवक्ताओं की सूची से ही अधिवक्ताओं की नियुक्ति करना। 3. कोर्ट केस से संबंधित खर्चों को नियंत्रित करने के लिए स्पष्ट नीति अपनाना। 4. कार्यकारी परिषद (ईसी) की बैठक में पारित प्रस्तावों को विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अनिवार्य रूप से प्रकाशित करना। 5. विदेशी छात्राओं को वापस कैंपस में लाकर उनकी पढ़ाई पूर्ण कराने के लिए सक्रिय कदम उठाना। संगठन ने रजिस्ट्रार से इन मांगों को एक महीने के भीतर लागू करने का अनुरोध किया है। ज्ञापन पर 65 शिक्षकों ने हस्ताक्षर किए हैं।

इस बीच, अन्य सूत्रों के अनुसार, बीते तीन वर्षों में विश्वविद्यालय प्रशासन ने कानूनी खर्चों पर करीब एक करोड़ रुपये खर्च किए हैं। छात्रों और विभिन्न संगठनों द्वारा लंबे समय से इस खर्च की पारदर्शिता की मांग की जा रही है। हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अभी तक इस विषय पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
गौरतलब है कि कुछ महीने पहले तृणमूल छात्र परिषद ने भी इन खर्चों को लेकर सवाल उठाए थे और आंदोलन किया था। अब देखना होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन इन मांगों पर क्या कदम उठाता है।















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