

आसनसोल : शिल्पांचल में नववर्ष 2025 का उत्साह और उल्लास व्यापक रूप से देखा गया। नववर्ष के पहले दिन, 1 जनवरी को, क्षेत्र के लोगों ने अपने-अपने तरीके से वर्ष के शुभारंभ का स्वागत किया। कोई मंदिरों में जाकर ईश्वर की आराधना कर रहा था, तो कोई परिवार, दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ पर्यटन स्थलों पर जाकर आनंद ले रहा था।

आसनसोल और उसके आस-पास के क्षेत्रों में भक्तों की भीड़ विभिन्न मंदिरों में उमड़ पड़ी। श्रद्धालुओं ने न केवल पूजा-अर्चना की बल्कि अपने परिवार और समाज के लिए सुख-समृद्धि और शांति की कामना भी की। क्षेत्र के प्रसिद्ध मां घाघरबुड़ी मंदिर में भक्तों का जनसैलाब सुबह से ही देखा गया। सुबह 3:30 बजे से ही मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया था। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, श्रद्धालुओं की संख्या हजारों में पहुंच गई।
मंदिर के पुरोहित ने बताया कि नववर्ष के पहले दिन हर वर्ष यहां भारी भीड़ उमड़ती है, लेकिन इस बार श्रद्धालुओं की संख्या असामान्य रूप से अधिक रही। भक्तों ने मां घाघरबुड़ी के चरणों में नारियल, फूल और प्रसाद अर्पित कर अपने जीवन में सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।

राजनीतिक हस्तियों की उपस्थिति
नववर्ष के इस पावन अवसर पर राजनीतिक जगत से भी कई गणमान्य व्यक्ति मंदिर पहुंचे। भाजपा विधायक लक्ष्मण घोड़ुई ने दुर्गापुर के कालीबाड़ी में पूजा-अर्चना करने के बाद मां घाघरबुड़ी मंदिर में दर्शन किए। उन्होंने कहा कि उन्होंने इस अवसर पर पूरे क्षेत्र, राज्य और देशवासियों के सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की। उन्होंने यह भी आशा जताई कि नववर्ष बंगाल के हर घर में शांति और प्रगति लेकर आए।
सामाजिक और आध्यात्मिक समर्पण
मंदिर परिसर में भक्तों के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को संभालने के लिए स्वयंसेवकों ने विशेष रूप से योगदान दिया। भक्तों ने माता के दर्शन करने के बाद परिसर में प्रसाद वितरण और भजन-कीर्तन का आनंद लिया। मंदिर के बाहर भी श्रद्धालु कतारबद्ध होकर अपनी बारी की प्रतीक्षा कर रहे थे।
नववर्ष का उमंग और उत्साह
न केवल मंदिरों में बल्कि पर्यटन स्थलों और पिकनिक स्पॉट पर भी नववर्ष की खुशियां मनाई गईं। क्षेत्र के लोग परिवार और दोस्तों के साथ प्रकृति की गोद में समय बिताने और स्वादिष्ट भोजन का आनंद लेने पहुंचे।
आसनसोल का यह नववर्ष समारोह न केवल धार्मिक उत्सव का प्रतीक बना, बल्कि समाज में एकता, प्रेम और आध्यात्मिकता का संदेश भी फैलाया।















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