9 वर्षीय आशि श्रीवास्तव ने कराटे चैंपियनशिप में रचा इतिहास

Facebook
Twitter
WhatsApp

ghanty

बर्नपुर : रिवरसाइड स्कूल की तीसरी कक्षा की छात्रा आशि श्रीवास्तव ने मात्र 9 वर्ष की आयु में ऐसा अद्वितीय कीर्तिमान स्थापित किया है, जो न केवल उसके विद्यालय बल्कि समूचे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय बन गया है। वाराणसी स्थित हिंदू यूनिवर्सिटी इनडोर स्टेडियम में आयोजित 22वीं ऑल इंडिया इंटर स्कूल एवं सीनियर कराटे चैंपियनशिप “फेडरेशन कप” 2024 में आशि ने 1 स्वर्ण और 1 रजत पदक अपने नाम कर विद्यालय और परिजनों को गर्वित किया।

IMG 20240910 WA0035 4

आशि के पिता अनूप कुमार श्रीवास्तव ने अपनी बेटी की इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, “एक पिता के रूप में मुझे अपनी बेटी पर गर्व है। आशि ने बचपन से ही अपनी रुचि से कराटे चुना और कड़ी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया। मुझे विश्वास है कि वह भविष्य में अपनी लगन और परिश्रम से देश का नाम वैश्विक स्तर पर रोशन करेगी।”

आशि के कराटे प्रशिक्षक श्री सिंकु बनर्जी ने उनकी असाधारण प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा, “आशि मेरे प्रशिक्षण की सबसे मेधावी छात्रा है। उसने मात्र 5 वर्ष की आयु से कराटे का अभ्यास प्रारंभ किया और हर प्रतियोगिता में अपनी योग्यता सिद्ध की। वाराणसी में विभिन्न राज्यों के अनुभवी प्रतियोगियों के समक्ष उसने उल्लेखनीय प्रदर्शन कर 1 स्वर्ण और 1 रजत पदक अर्जित किया। यदि वह शारीरिक रूप से पूर्ण स्वस्थ होती, तो संभवतः दोनों पदक स्वर्ण में परिवर्तित हो जाते। आशि में असीम संभावनाएं और अथक परिश्रम की क्षमता है।”

विद्यालय के प्रधानाचार्य और शिक्षकों ने आशि की इस उपलब्धि को विद्यालय के लिए गौरव का क्षण बताते हुए कहा, “आशि न केवल हमारे विद्यालय बल्कि पूरे क्षेत्र का गौरव है। हम उसके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हैं।”

IMG 20240918 WA0025

अपनी सफलता पर प्रसन्न आशि ने कहा, “मैंने 5 वर्ष की आयु से कराटे का अभ्यास प्रारंभ किया और रोज़ कठिन परिश्रम करती हूं। मेरे पिता मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा हैं। मैं हर प्रतियोगिता में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करती हूं और अपने देश का नाम रोशन करना चाहती हूं।”

आशि के कोच ने यह भी बताया कि इससे पहले कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम में आयोजित प्रतियोगिताओं में भी आशि ने 2 स्वर्ण पदक जीते हैं। उन्होंने कहा, “वाराणसी प्रतियोगिता में शारीरिक अस्वस्थता के बावजूद आशि का प्रदर्शन अनुकरणीय रहा। हर पदक उसके निरंतर परिश्रम और समर्पण का प्रतिफल है।”

आशि के पिता ने अंत में कहा, “यदि आशि इसी प्रकार मेहनत करती रही, तो वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत का नाम गर्व से ऊंचा करेगी। हमारी शुभकामनाएं हमेशा उसके साथ हैं।”

Leave a Comment

Leave a Comment

[democracy id="1"]

Share Market

Also Read This

Gold & Silver Price

Our Visitor

0 4 1 7 6 5
Users Today : 0
Users Yesterday : 14