
दुर्गापुर : दुर्गापुर स्थित हेल्थ वर्ल्ड निजी अस्पताल पर गंभीर आरोप सामने आए हैं। धनबाद निवासी कुंतल साहा के परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन ने उपचार के दौरान मृत्यु के पश्चात पार्थिव शरीर को तब तक नहीं सौंपा, जब तक कि उनकी मांगानुसार शेष धनराशि जमा नहीं की गई।
मृतक के पुत्र अरित्र साहा ने बताया कि उनके पिता को 6 दिसंबर को न्यूरो सर्जरी के लिए झारखंड से दुर्गापुर के इस प्रतिष्ठित अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों ने बेहतर चिकित्सा सुविधाओं की आशा में यह कदम उठाया था। ऑपरेशन के पश्चात न्यूरो सर्जन छुट्टी पर चले गए और मरीज को सामान्य चिकित्सकों के हवाले कर दिया गया। इसके बाद 17 दिसंबर को उनके पिता को हृदय संबंधी समस्या हुई और उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया।

अरित्र ने कहा कि 27 दिसंबर को अस्पताल प्रशासन से उनके पिता की मृत्यु की सूचना मिली। इस दौरान परिजनों ने इलाज के लिए पहले ही 4 लाख 35 हजार रुपये का भुगतान कर दिया था, किंतु अस्पताल ने शेष 5 लाख रुपये की मांग करते हुए पार्थिव शरीर सौंपने से इनकार कर दिया। अरित्र का कहना है कि परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है और उनके पिता ही परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे।
परिजनों ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने उपचार से संबंधित दस्तावेज मांगे, तो अस्पताल ने वह भी उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया। इस घटना से आहत परिजनों ने अस्पताल के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा स्वीकृत “पेशेंट राइट्स चार्टर” के अनुसार, किसी भी अस्पताल को बिल की शेष राशि न चुकाने के आधार पर शव को रोकने का अधिकार नहीं है। मृतक के परिजनों को शव सौंपना अस्पताल की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है। बावजूद इसके, निजी अस्पतालों द्वारा इस प्रकार की मनमानी के आरोप समय-समय पर लगते रहे हैं।
घटना की जानकारी मिलने पर स्थानीय पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। पुलिस का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने एक बार फिर निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। ऐसी घटनाएं न केवल परिजनों के लिए हृदयविदारक होती हैं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं पर विश्वास को भी कमजोर करती हैं।















Users Today : 15
Users Yesterday : 31