

बराकर : पश्चिम बंगाल के कुल्टी विधानसभा अंतर्गत बराकर के बलतोड़िया क्षेत्र में सोमवार को रेलवे की जमीन खाली कराने को लेकर गहरा तनाव उत्पन्न हो गया। इस घटना ने राज्य और केंद्र सरकार के बीच विवाद को एक बार फिर सतह पर ला दिया। रेलवे की जमीन पर वर्षों से रह रहे परिवारों को बेदखल करने के लिए रेलवे अधिकारियों और आरपीएफ की संयुक्त टीम ने बुलडोजर के साथ अभियान चलाने की कोशिश की, लेकिन तृणमूल कांग्रेस की तीव्र प्रतिक्रिया ने इसे विफल कर दिया।
रेलवे अधिकारियों द्वारा क्षेत्र के परिवारों को पहले ही जमीन खाली करने का नोटिस जारी किया गया था, जिसमें उन्हें एक निर्धारित समयसीमा दी गई थी। सोमवार सुबह 10 बजे रेलवे अधिकारी और आरपीएफ के जवान बुलडोजर के साथ स्थल पर पहुंचे। इस अभियान का विरोध करते हुए आसनसोल नगर निगम की मेयर परिषद सदस्य इंद्राणी मिश्रा स्थानीय तृणमूल कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ मौके पर पहुंचीं। उन्होंने जमीन खाली कराने से पहले बेदखल परिवारों के पुनर्वास की मांग करते हुए जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

इंद्राणी मिश्रा ने राज्य की सत्ताधारी पार्टी का पक्ष रखते हुए कहा, “यह बंगाल है, न कि उत्तर प्रदेश या गुजरात। यहां बुलडोजर चलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। पहले इन परिवारों को पुनर्वास दिया जाना चाहिए।” मौके पर तृणमूल कार्यकर्ताओं ने “बुलडोजर राज” के खिलाफ नारेबाजी की और रेलवे के अधिकारियों को अभियान रोकने पर मजबूर कर दिया।
इस दौरान भाजपा के कुल्टी विधायक डॉ. अजय पोद्दार भी स्थिति का जायजा लेने पहुंचे। लेकिन तृणमूल कांग्रेस समर्थकों ने उनके खिलाफ “गो बैक” के नारे लगाए, जिससे माहौल और गरमा गया। डॉ. पोद्दार ने तृणमूल कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन को राजनीति प्रेरित करार देते हुए राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिखने की बात कही। उन्होंने कहा, “राज्य सरकार जानबूझकर रेलवे की कार्रवाई में बाधा डाल रही है। मैं इन परिवारों के पुनर्वास के लिए मुख्यमंत्री से अपील करूंगा।”
दो घंटे तक चले इस तनावपूर्ण घटनाक्रम में आरपीएफ के जवानों ने स्थिति को संभालने का प्रयास किया। अंततः रेलवे अधिकारियों ने उच्चस्तरीय बातचीत के बाद इस अभियान को फिलहाल स्थगित कर दिया।

रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “स्थिति का गहन अध्ययन करने और सभी पक्षों से बातचीत के बाद ही आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।”
गौरतलब है कि रेलवे और अन्य केंद्रीय एजेंसियों की जमीनों पर कब्जा और उसे खाली कराने के प्रयास के दौरान राज्य और केंद्र सरकार के बीच टकराव कोई नई बात नहीं है। आसनसोल सहित अन्य क्षेत्रों में भी इस तरह की घटनाएं अक्सर देखने को मिलती हैं। तृणमूल कांग्रेस राज्य में इन कार्रवाइयों को जनविरोधी और अमानवीय करार देती रही है, जबकि भाजपा इसे राजनीतिक अड़ंगा बताकर तृणमूल पर निशाना साधती है।
बराकर में हुई इस घटना ने न केवल प्रभावित परिवारों की दुर्दशा को उजागर किया है, बल्कि पुनर्वास और बेदखली के मानवीय पहलू पर भी सवाल खड़े किए हैं। अब सभी की निगाहें केंद्र और राज्य सरकार के बीच इस मुद्दे पर होने वाले अगले कदम पर टिकी हैं।















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