
आसनसोल : जिला सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में पिछले दो महीनों से अल्ट्रासोनोग्राफी (यूएसजी) जांच बंद होने के कारण मरीजों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस सेवा के लिए अस्पताल में मात्र एक रेडियोलॉजिस्ट उपलब्ध थे, जो अब छुट्टी पर हैं। उनकी अनुपस्थिति में यूएसजी सेवा पूरी तरह ठप है। न तो डॉक्टर की वापसी की कोई जानकारी है और न ही किसी वैकल्पिक व्यवस्था का संकेत।
आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों की बढ़ी परेशानी
जिले के इस प्रमुख अस्पताल में प्रतिदिन सैकड़ों मरीज, खासकर गर्भवती महिलाएं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, इलाज के लिए आते हैं। यहां यूएसजी सेवा निशुल्क उपलब्ध होती थी। प्रतिदिन 65 से 75 मरीजों की जांच की जाती थी। अब स्थिति यह है कि जो लोग निजी जांच केंद्रों पर हजारों रुपये खर्च कर सकते हैं, वे बाहर से जांच कराकर इलाज करवा रहे हैं। वहीं, आर्थिक रूप से कमजोर मरीज, जिन्हें निजी जांच केंद्रों की भारी-भरकम फीस वहन करने में कठिनाई होती है, बिना जांच के ही इलाज के लिए बाध्य हो रहे हैं।

अस्पताल प्रशासन की स्थिति स्पष्ट नहीं
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि यूएसजी सेवा ठप होने का मुख्य कारण रेडियोलॉजिस्ट का लंबी छुट्टी पर चले जाना है। अस्पताल के अधीक्षक, डॉ. निखिल चंद्र दास ने बताया कि वर्तमान में अस्पताल में केवल एक ही रेडियोलॉजिस्ट कार्यरत थे। उन्होंने पहले कुछ दिनों की छुट्टी ली, लेकिन अब लगातार अपनी छुट्टी बढ़ा रहे हैं। वरिष्ठ डॉक्टरों के सेवानिवृत्त होने के बाद विभाग में यह अकेले डॉक्टर थे। ऐसे में विभाग पूरी तरह ठप हो गया है।
स्वास्थ्य विभाग का आश्वासन
जिला मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमओएच) डॉ. यूनुस खान ने बताया कि समस्या की गंभीरता को देखते हुए इसे राज्य स्वास्थ्य विभाग को सूचित किया गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मुद्दे का समाधान जल्द किया जाएगा और यूएसजी सेवा को पुनः चालू किया जाएगा।
महत्वपूर्ण विभागों में डॉक्टरों की कमी
अस्पताल में केवल रेडियोलॉजिस्ट ही नहीं, बल्कि अन्य कई महत्वपूर्ण विभाग भी डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे हैं। कुछ वरिष्ठ चिकित्सकों ने अपनी सेवानिवृत्ति की अर्जी दी है, जबकि कुछ डॉक्टर नौकरी छोड़ने की सोच रहे हैं। इससे अस्पताल की सेवाओं पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।

मरीजों में गहरी नाराजगी
मरीजों और उनके परिजनों ने इस स्थिति पर गहरी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि सरकार द्वारा मुफ्त इलाज और जांच की घोषणा के बावजूद अस्पतालों में सेवाएं ठप हैं। मरीजों को निजी केंद्रों पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जो गरीब तबके के लिए संभव नहीं है।
राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग को शीघ्र ही ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि अस्पताल की सेवाएं पुनः सामान्य हो सकें और गरीब मरीजों को राहत मिले।















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