
आसनसोल : पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग ने एक आधिकारिक अधिसूचना जारी करते हुए पश्चिम बंगाल फार्मास्युटिकल्स द्वारा निर्मित 14 औषधियों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। इनमें प्रमुख रूप से रिंगर्स लैक्टेट, डेक्सट्रोज़ इन्फ्यूज़न, मैनिटोल इन्फ्यूज़न, ऑफ़्लोक्सासिन, पैरासिटामोल इन्फ्यूज़न सहित अन्य औषधियाँ सम्मिलित हैं। विभाग ने निर्देशित किया है कि इन औषधियों का उपयोग सरकारी अस्पतालों में किसी भी स्थिति में नहीं किया जाएगा, चाहे वे वर्तमान में भंडारण में उपलब्ध हों।

इस कठोर निर्णय का आधार मिदिनीपुर मेडिकल कॉलेज में घटित एक दुखद घटना को बताया जा रहा है। प्रसव के दौरान एक महिला को निम्न गुणवत्ता वाली रिंगर्स लैक्टेट सैलाइन दी गई थी, जिससे महिला की मृत्यु हो गई और तीन अन्य की स्थिति गंभीर हो गई। इन मरीजों को तत्पश्चात कोलकाता स्थित एसएसकेएम अस्पताल में रेफर किया गया। प्रारंभिक जांच में इन औषधियों की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लगाए गए, जिसके चलते सरकार ने यह कार्रवाई की है।
स्वास्थ्य विभाग ने इस घटना के बाद त्वरित आपातकालीन आदेश जारी करते हुए पश्चिम बंगाल फार्मास्युटिकल्स की समस्त औषधियों का उपयोग राज्य के अस्पतालों में प्रतिबंधित कर दिया। विभाग ने सभी अस्पतालों को सख्त निर्देश दिए हैं कि ये औषधियाँ किसी भी स्थिति में मरीजों को न दी जाएं।

इस निर्णय के परिणामस्वरूप औषधियों की आपूर्ति श्रृंखला और अस्पतालों में उपलब्ध चिकित्सा उपकरणों पर असर पड़ने की संभावना व्यक्त की जा रही है। राज्य सरकार ने हालांकि वैकल्पिक व्यवस्था के लिए कदम उठाने की बात कही है।
उक्त घटना ने राज्य की औषधि गुणवत्ता और नियंत्रण प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों और स्वास्थ्य अधिकार संगठनों ने औषधियों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कठोर निगरानी प्रणाली लागू करने की मांग की है। इस घटनाक्रम ने चिकित्सा प्रणाली की जवाबदेही और औषधि निर्माताओं की जिम्मेदारी पर भी बहस छेड़ दी है।















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