
अंडाल : कोयला डीओ (डिलीवरी ऑर्डर) सिंडिकेट का सरताज कौन होगा, इसकी चाबी किसके हाथों में होगी, इस सवाल को लेकर कोयला क्षेत्रों में सियासी और आपराधिक गतिविधियां तेज हैं। डीओ सिंडिकेट पर नियंत्रण के संघर्ष के बीच ईसीएल (ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) के विभिन्न डिपो में रंगदारी का कारोबार बेरोकटोक जारी है।
इसी कड़ी में अंडाल थाना पुलिस ने सिंडिकेट के नाम पर रंगदारी मांगने के आरोप में रानीगंज निवासी नरेश राम को गिरफ्तार किया है। नरेश पर 1050 रुपये प्रति टन रंगदारी वसूलने और धमकी भरे संदेश भेजने का गंभीर आरोप है। पुलिस ने उसे दुर्गापुर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई और उसे एक दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया।

सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सख्त निर्देशों के बाद भले ही डीओ सिंडिकेट के बड़े खिलाड़ी अंडरग्राउंड हो गए हैं, लेकिन यह अवैध धंधा छुटभैये नेताओं और स्थानीय गुंडों के जरिए अब भी सक्रिय है। ईसीएल के कोयला उठाव के हर टन पर रंगदारी वसूली जा रही है। नरेश राम ने सोशल मीडिया और मोबाइल के माध्यम से धमकी देकर उत्तर प्रदेश की एक कंपनी से रंगदारी की मांग की थी। कंपनी ने इस मामले की शिकायत पुलिस से की, जिसके बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए नरेश को दबोच लिया।
यह गिरफ्तारी जहां पुलिस की तत्परता को दर्शाती है, वहीं यह सवाल खड़ा करती है कि नरेश राम के पीछे और कौन-कौन से बड़े नाम शामिल हो सकते हैं। सिंडिकेट के इस अवैध धंधे की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका खुलासा होना बाकी है।

स्थानीय लोगों और उद्योग जगत में यह चर्चा का विषय बन गया है कि आखिर यह रंगदारी कारोबार कब तक चलेगा और इसके पीछे कौन सी ताकतें काम कर रही हैं। प्रशासनिक सख्ती और पुलिस की कार्रवाई के बावजूद सिंडिकेट का यह गोरखधंधा रुकने का नाम नहीं ले रहा है।
ईसीएल और पुलिस प्रशासन को मिलकर इस सिंडिकेट के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए व्यापक कदम उठाने की जरूरत है। वहीं, कोयला क्षेत्र के ईमानदार कारोबारियों और आम जनता को सुरक्षा का भरोसा दिलाना भी प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।















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