
आसनसोल : कुलटी स्थित रनितला की रहने वाली अनुष्का बंद्योपाध्याय ने राष्ट्रीय युवा महोत्सव में अपने ओजस्वी विचारों और शानदार प्रस्तुति से सर्वश्रेष्ठ वक्ता का खिताब जीतकर क्षेत्र का नाम रोशन किया। वर्तमान में पुणे, महाराष्ट्र में एक निजी संगठन के साथ शिक्षण कार्यरत अनुष्का ने अपनी प्रतिभा से न केवल स्वयं को साबित किया, बल्कि अपनी साधारण पृष्ठभूमि को भी गौरव का प्रतीक बना दिया।
अनुष्का के पिता परिमल बंद्योपाध्याय, जो रनितला में एक साधारण चप की दुकान चलाते हैं और आवश्यकतानुसार पर्यटक दलों या समारोहों में रसोइए का कार्य करते हैं, ने अपनी मेहनत और संघर्ष से अपने परिवार का पालन-पोषण किया। उनकी बड़ी बेटी अनुष्का ने कुलटी कॉलेज से अंग्रेज़ी में ऑनर्स के साथ स्नातक की डिग्री हासिल की और इसके पश्चात सिद्धू-कान्हू विश्वविद्यालय, पुरुलिया से जनसंचार एवं पत्रकारिता में स्वर्ण पदक प्राप्त किया।

हाल ही में दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित राष्ट्रीय युवा महोत्सव के दौरान अनुष्का ने ‘2047 में भारत का भविष्य’ विषय पर अपनी विचारशील और प्रभावी वक्तव्य से निर्णायकों का दिल जीत लिया। उन्होंने अपने भाषण में भारत की एकता, साम्प्रदायिक सौहार्द और लैंगिक सुरक्षा को प्रमुखता से रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “2047 का भारत ऐसा हो, जहां हर धर्म के लोग एकजुट होकर कदम से कदम मिलाकर चलें। यह हमारा सच्चा भारत होगा। साथ ही, महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो और हमारा देश हर प्रकार के अत्याचार, विशेषकर महिलाओं के खिलाफ अपराधों से मुक्त हो।”
तीन मिनट के इस भाषण प्रतियोगिता में अनुष्का ने देशभर से आए 78 प्रतिभागियों को पीछे छोड़ते हुए साहसिक और स्पष्ट विचारों के साथ विजेता का खिताब अपने नाम किया। उनके पिता ने इस अवसर पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा, “अनुष्का ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने जुनून और मेहनत से यह मुकाम हासिल किया है। बचपन से ही उसने भाषण प्रतियोगिताओं में कई पुरस्कार जीते हैं।”

अनुष्का ने अपने माता-पिता को अपनी सफलता का श्रेय देते हुए कहा, “पिता की मेहनत और मां के समर्पण के कारण ही आज मैं यहां तक पहुंच पाई हूं। मेरी ख्वाहिश है कि मैं एक कुशल पत्रकार बनकर समाज की सेवा करूं।”
उनकी इस सफलता पर क्षेत्रीय समाजसेवी सुब्रत सिन्हा ने कहा, “अनुष्का बचपन से ही भाषण और पढ़ाई में उत्कृष्ट रही है। उसकी सफलता ने यह साबित किया है कि साधारण पृष्ठभूमि भी असाधारण उपलब्धियों की कहानी लिख सकती है।”















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