

अंडाल : बुधवार सुबह से पांडवेश्वर क्षेत्र की तिलाबनी कोलियरी में जमीन के बदले नौकरी की मांग को लेकर प्रदर्शनकारियों ने एमडीओ (माइन डेवलपमेंट ऑपरेटर) प्रोजेक्ट का संचालन पूरी तरह ठप कर दिया। आंदोलनकारी स्पष्ट रूप से कह रहे हैं कि जब तक ईसीएल (ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) की ओर से लिखित आश्वासन नहीं मिलेगा, तब तक कोलियरी का कार्य फिर से शुरू नहीं होने देंगे।
जानकारी के अनुसार, करीब 500 स्थानीय ज़मीनदाताओं ने बीते कई वर्षों से अपनी जमीन ईसीएल को दी है, लेकिन वादा किए जाने के बावजूद अब तक उन्हें नौकरी नहीं दी गई। प्रदर्शनकारी सौरव बनर्जी ने बताया कि 2023 से ईसीएल के विभिन्न कार्यालयों में बार-बार ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन उनकी मांगों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सौरव ने यह भी कहा कि इससे पहले भी उन्होंने कई बार विरोध कर कोलियरी का कार्य बाधित किया, लेकिन हर बार ईसीएल अधिकारियों के मौखिक आश्वासन पर आंदोलन वापस ले लिया गया। अब प्रदर्शनकारी ईसीएल अधिकारियों की “खोखली बातों” पर विश्वास नहीं कर रहे।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कंपनी ने झूठे वादों के आधार पर उनकी जमीन ली और अब उन्हीं जमीनों पर उत्पादन कार्य शुरू कर दिया गया है। ऐसे में उनका सीधा और स्पष्ट दावा है – जमीन के बदले नौकरी। वे लिखित आश्वासन की मांग पर अड़े हुए हैं और चेतावनी दी है कि यदि बुधवार को भी कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला, तो आंदोलन और अधिक उग्र और व्यापक रूप लेगा।
कोलियरी के एजेंट अनिल कुमार पांडे ने बताया कि जमीन के बदले नौकरी संबंधी दस्तावेज पहले ही मुख्यालय भेजे जा चुके हैं और उम्मीद है कि आने वाले एक-दो दिनों में समाधान निकल आएगा। हालांकि, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अब वे केवल ठोस, लिखित आश्वासन ही स्वीकार करेंगे।

इस आंदोलन के कारण बुधवार सुबह से कोलियरी में कोयला उत्पादन और परिवहन पूरी तरह बाधित है, जिससे ईसीएल को लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है। स्थानीय प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है, लेकिन फिलहाल समाधान के कोई संकेत नहीं हैं। आंदोलन के इस स्वरूप ने एक बार फिर जमीन के बदले नौकरी जैसे संवेदनशील मुद्दे को राज्य स्तर पर चर्चा में ला दिया है।















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