

जामुड़िया : ईसीएल (ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) के श्रीपुर-सातग्राम क्षेत्र अंतर्गत निंघा कोलियरी और निंघा एसएसआई खदान को लेकर चल रहे श्रमिक आंदोलन में अब नया मोड़ आ गया है। ईसीएल प्रबंधन द्वारा निंघा एसएसआई खदान के 20 कामगारों का अन्य खदानों में तबादला किए जाने की अधिसूचना जारी होने के बाद कामगारों और श्रमिक संगठनों का गुस्सा फूट पड़ा।
श्रमिक संगठनों ने आरोप लगाया कि यह तबादला ईसीएल प्रबंधन की एक सोची-समझी साजिश है, जिसके तहत निंघा ग्रुप ऑफ माइंस के तहत संचालित खदानों को धीरे-धीरे बंद करने की योजना बनाई जा रही है। जॉइंट एक्शन कमेटी (जेएसी) ने इस कदम का तीखा विरोध किया और जुलूस निकालकर ईसीएल प्रबंधन का घेराव किया।

सीटू नेता बीरेंद्र महतो ने प्रबंधन पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह निर्णय कामगारों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है और मनमानीपूर्ण रवैये का उदाहरण है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तबादले की अधिसूचना को वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है।
प्रबंधन की ओर से आंदोलनरत कामगारों को फिलहाल अस्थायी तौर पर हाजिरी बनाने का आश्वासन दिया गया, लेकिन जेएसी ने इस पर असहमति जताते हुए कहा कि जब तक स्थायी रूप से स्थानांतरित किए गए श्रमिकों को वापसी नहीं मिलती, तब तक वे आंदोलन जारी रखेंगे।

तबादला किए गए प्रमुख कामगारों में सनातन भुइयां, दातु माजी, मुन्ना हरिजन, सुकुमार बाउरी, बैद्यनाथ मांडी, गंगासागर यादव, शेख शरीफ, परमेश्वर तांती, अनुकूल पासवान, दीनानाथ राम, राजेश माझी, नव धीवर, रज्जाक मियां, सबन मांझी, हरिंदर गोप, बजरंग नोनिया, मोहम्मद लुकमान मियां, चंद्रशेखर दुसाद, मुंसी दास और भीम वाद्यकर शामिल हैं।
स्थानीय श्रमिक संगठनों का कहना है कि यदि प्रबंधन इसी तरह खदानों को बंद करने की दिशा में कदम उठाता रहा, तो हजारों परिवारों की आजीविका खतरे में पड़ जाएगी। उन्होंने मांग की है कि तबादला आदेश रद्द कर, खदानों के संचालन को यथावत रखा जाए।
स्थिति को देखते हुए इलाके में तनाव बना हुआ है l















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