
आसनसोल : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की विधायक और 2024 के लोकसभा चुनाव में मिदनापुर संसदीय क्षेत्र से प्रत्याशी रहीं अग्निमित्रा पाल पर चुनावी हलफनामे में संपत्ति और पति की आय से संबंधित जानकारी छुपाने का गंभीर आरोप लगा है। इस मामले को लेकर मेदिनीपुर लोकसभा क्षेत्र के मतदाता श्यामल रॉय ने चुनाव आयोग, राष्ट्रपति और राज्यपाल को पत्र लिखकर शिकायत दर्ज कराई है।

श्यामल रॉय ने अपने पत्र में दावा किया है कि अग्निमित्रा पाल ने 2024 के लोकसभा चुनाव में नामांकन के दौरान दाखिल किए गए हलफनामे में अपनी कुछ संपत्तियों का खुलासा नहीं किया। उनका आरोप है कि अग्निमित्रा ने कोलकाता के बालीगंज इलाके में स्थित एक 1300 वर्ग फीट के फ्लैट और 200 वर्ग फीट के गैराज की जानकारी हलफनामे में नहीं दी। यह संपत्ति कोलकाता नगर निगम के वार्ड नंबर 19 में 50बी हाजरा रोड पर स्थित है, जो 8 जुलाई 2022 को अग्निमित्रा पाल के नाम पर पंजीकृत हुई थी।

श्यामल रॉय ने यह भी आरोप लगाया है कि अग्निमित्रा पाल ने अपने पति पार्थ पाल की आय का भी पूरा विवरण हलफनामे में नहीं दिया। उनके अनुसार, हलफनामे में वित्तीय वर्ष 2018-19 और 2019-20 के लिए पति की आय का विवरण दिया गया था, लेकिन वित्तीय वर्ष 2020-21, 2021-22 और 2022-23 का उल्लेख नहीं किया गया। उन्होंने इसे लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 33ए का उल्लंघन बताया और चुनाव आयोग से इस मामले में उचित कार्रवाई करने की मांग की है।

इसके साथ ही श्यामल रॉय ने अपने आरोपों के समर्थन में कुछ दस्तावेज भी चुनाव आयोग को सौंपे हैं। उनका कहना है कि किसी भी प्रत्याशी को अपने नामांकन पत्र के साथ अपनी चल-अचल संपत्तियों और पारिवारिक आय का पूरा विवरण प्रस्तुत करना आवश्यक होता है, लेकिन अग्निमित्रा पाल ने ऐसा नहीं किया।
अग्निमित्रा पाल ने क्या कहा?
इस मामले पर जब भाजपा विधायक और पूर्व लोकसभा प्रत्याशी अग्निमित्रा पाल से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस आरोप की कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि जब उन्हें इस मामले की पूरी जानकारी मिलेगी, तभी वह इस पर कोई प्रतिक्रिया देंगी।
चुनाव आयोग की कार्रवाई पर नजर
अब यह देखना होगा कि चुनाव आयोग इस शिकायत को लेकर क्या कदम उठाता है। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह भाजपा नेता के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी माहौल में इस तरह के आरोप अक्सर लगाए जाते हैं, जिनकी सत्यता की जांच करना आवश्यक होता है।
फिलहाल, इस मामले को लेकर भाजपा और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। जहां भाजपा इसे एक राजनीतिक साजिश बता सकती है, वहीं विपक्ष इस मुद्दे को बड़ा चुनावी हथियार बना सकता है। चुनाव आयोग इस शिकायत पर क्या रुख अपनाता है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।















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