
आसनसोल : चित्तरंजन रेल नगर के अमलादही बाजार में रेल प्रशासन ने अवैध दुकानों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 145 दुकानों को ध्वस्त कर दिया। यह बाजार पिछले 50-60 वर्षों से स्थानीय व्यापारियों और जनता के जीवन का केंद्र था। प्रशासन की इस कार्रवाई से व्यापारियों में आक्रोश और निराशा का माहौल है।

कड़े सुरक्षा इंतजाम के बीच कार्रवाई
रेल प्रशासन ने इस अभियान को अंजाम देने के लिए आरपीएफ और अन्य सुरक्षा बलों की व्यापक व्यवस्था की थी। आरपीएफ के 9 इंस्पेक्टर, 40 जवान, 2 महिला इंस्पेक्टर, 7 महिला आरपीएफ कर्मी और 24 आईओडब्ल्यू अधिकारियों की मौजूदगी में कार्रवाई की गई। चार बुलडोजर लगातार बाजार की दुकानों को जमींदोज करते रहे। प्रशासन का यह कदम पूर्व नियोजित था, जिससे व्यापारियों को अपनी दुकानें खाली करने के लिए पहले ही नोटिस दिया गया था।

व्यापारियों की अंतिम उम्मीदें टूटीं
कई व्यापारियों ने रातभर में अपना सामान निकाल लिया था, फिर भी कुछ व्यापारियों ने आखिरी उम्मीद के साथ सुबह अपनी दुकानें खोलीं। कोई चाय और नाश्ता बेच रहा था तो कोई सर्दियों के कपड़े लेकर दुकान पर बैठा था। लेकिन बुलडोजरों के सामने उनकी उम्मीदें टिक नहीं पाईं। बिना किसी विरोध के दुकानों को ध्वस्त कर दिया गया।
राजनीतिक प्रयास भी असफल
इससे पहले, सीपीआईएम, भाजपा और तृणमूल कांग्रेस समेत कई राजनीतिक दलों और उनके श्रमिक संगठनों ने बाजार को बचाने के लिए रैल प्रशासन से अनुरोध किया था। स्थानीय विधायक और नगर निगम के महापौर विधान उपाध्याय, बामपंथी नेता बंशगोपाल चौधरी, भाजपा विधायक अजय पोद्दार और राज्य भाजपा नेता अग्निमित्रा पॉल ने भी इस मामले में हस्तक्षेप करने की कोशिश की। हालांकि, इन सभी प्रयासों के बावजूद प्रशासन ने कार्रवाई को अंजाम दिया।
स्थानीय लोगों की व्यथा
अमलादही बाजार के व्यापारी इस कार्रवाई के बाद बेहद व्यथित और हताश हैं। यह बाजार उनके परिवार के भरण-पोषण का एकमात्र जरिया था। एक व्यापारी ने दुख व्यक्त करते हुए कहा, “अगर प्रशासन ने हमारी दुकानों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की, तो हमें भूखों मरना पड़ेगा। हमारे पास कोई अन्य साधन नहीं है।”

आने वाले दिनों में और भी अभियान संभव
आरपीएफ के असिस्टेंट सिक्योरिटी कमिश्नर सोमनाथ चक्रवर्ती ने बताया कि इस अभियान के लिए सभी पक्षों की सहमति ली गई थी। उन्होंने कहा कि इससे पहले दो बार अभियान स्थगित किया गया था, लेकिन इस बार कार्रवाई निर्बाध रूप से की गई। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि चित्तरंजन में जल्द ही अन्य अवैध निर्माणों पर भी बुलडोजर चलाया जा सकता है।
भविष्य अनिश्चित
वहीं, राजनीतिक दलों और स्थानीय संगठनों के दफ्तरों, क्लबों और अवैध विस्तार वाले रेलवे क्वार्टरों पर भी कार्रवाई की चर्चा तेज है। व्यापारियों ने प्रशासन से वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की है, ताकि उनके परिवारों की रोजी-रोटी बचाई जा सके।
इस घटना ने न केवल व्यापारियों की रोजी-रोटी छीन ली है, बल्कि चित्तरंजन रेल नगर के सामाजिक ताने-बाने को भी गहरा आघात पहुंचाया है।















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