
सितारामपुर : भाजपा सरकार के अधीनस्थ रेल विभाग के प्रबंधन में आने वाला पम्पू तालाब, जो छठ पूजा के अवसर पर सुर्खियों में आता है, अंततः सफाई कार्य के कारण चर्चाओं में है। यह दृश्य आसनसोल रेल मंडल के सितारामपुर रेलवे स्टेशन के निकटस्थ लोको टैंक के समीप स्थित पम्पू तालाब का है, जिसे ‘पम्पू छठ घाट’ के नाम से स्थानीय जन-मानस में जाना जाता है। पम्पू तालाब रेल विभाग के अधीन होने से इसकी सफाई और समुचित रखरखाव की जिम्मेदारी रेलवे प्रशासन पर है। किंतु हर वर्ष छठ पूजा के अवसर पर इस घाट की उपेक्षा देखी जाती है, जिसके कारण स्थानीय जनता में गहरा असंतोष व्याप्त रहता है।

पिछले दो दिन पूर्व स्थानीय भाजपा नेता टिंकू वर्मा एवं आसनसोल जिला न्यायालय के अधिवक्ता एवं भाजपा नेता विनोद कुमार सिंह ने पम्पू तालाब की जर्जर स्थिति और प्रशासनिक उदासीनता पर तीव्र नाराजगी व्यक्त की। उक्त नेताओं ने तालाब की उपेक्षित स्थिति के प्रति अपना विरोध प्रदर्शित करते हुए आसनसोल डीआरएम कार्यालय में एक ज्ञापन भी सौंपा। इस मुद्दे पर समाचार माध्यमों में रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद रेल प्रशासन की सक्रियता देखी गई। प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से सफाई कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए, ताकि श्रद्धालु एवं छठ व्रतियों को पूजा के दौरान किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
मंगलवार प्रातः 8 बजे से रेल विभाग के कर्मचारियों द्वारा पम्पू तालाब घाट की सफाई कार्य प्रारंभ हुआ। तल्लीनता से कार्य कर रहे सफाई कर्मियों के इस प्रयास से घाट के निकट एक नई रौनक देखी गई। रेल विभाग की ओर से यह कार्यवाही इस बात का संकेत है कि प्रशासनिक दायित्वों की अवहेलना के परिणामस्वरूप जनाक्रोश किस प्रकार प्रशासन को दायित्व निर्वहन के लिए बाध्य कर सकता है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि हर वर्ष छठ पूजा के समय प्रशासनिक उपेक्षा के कारण उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। रेल विभाग की ओर से जारी यह सफाई अभियान न केवल एक आवश्यक कदम है, बल्कि भविष्य में प्रशासनिक उत्तरदायित्वों के निर्वहन के प्रति गंभीरता की अपेक्षा भी करता है। जनता ने इस कार्य की सराहना करते हुए उम्मीद जताई है कि आने वाले वर्षों में इस प्रकार के प्रयास समय पर किए जाएँगे ताकि श्रद्धालुओं को पूजन कार्य में किसी असुविधा का सामना न करना पड़े।

यह पहल धार्मिक एवं सामाजिक जनभावनाओं के प्रति प्रशासनिक जागरूकता का द्योतक है और समस्त रेल प्रशासन से अपेक्षा की जाती है कि वह इस दिशा में निरंतरता बनाए रखे। स्थानीय जनता एवं श्रद्धालु इस कार्य से संतुष्ट दिखे, वहीं भाजपा नेताओं ने इसे प्रशासनिक चेतना का संकेत मानते हुए सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की है।















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