रानीगंज : तिलक रोड स्थित एक परिवार में घटित घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी। पत्नी द्वारा पति के अपहरण का आरोप लगाने और फिर पति द्वारा स्वयं के घर से भागने की सच्चाई ने इस प्रकरण को चौंकाने वाला बना दिया। पुलिस की जांच-पड़ताल के बाद अपहरण की कहानी झूठी साबित हुई, और मामला पूरी तरह से उलट गया।
घटना का आरंभ 23 सितंबर को हुआ, जब रजनीश शर्मा नामक व्यक्ति, जो पेशे से मिठाई दुकानदार हैं, अपने घर से अचानक लापता हो गए। उनकी पत्नी काजल किरण शर्मा ने रानीगंज थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद, 5 नवंबर को काजल ने आसनसोल कोर्ट में यह आरोप लगाया कि उनके पति का अपहरण उनके पड़ोसी और सेवानिवृत्त अशोक वर्मा ने किया है। काजल ने दावा किया कि अशोक ने फिरौती के तौर पर 10 लाख रुपये की मांग की है। कोर्ट के निर्देश पर रानीगंज थाना पुलिस ने अपहरण के इस मामले की गहन जांच शुरू की।
थाना प्रभारी बिकास दत्ता ने बताया कि जांच के दौरान पुलिस ने रजनीश के मोबाइल फोन की लोकेशन का पता लगाया। उनके मोबाइल सिग्नल कोलकाता के बेलूर, सोनागाछी, और अन्य स्थानों से मिलते रहे। अंततः, पुलिस ने रविवार रात कोलकाता न्यू मार्केट क्षेत्र स्थित एक होटल से रजनीश को खोज निकाला और उन्हें रानीगंज वापस लाया।
पुलिस पूछताछ में रजनीश ने जो खुलासा किया, उसने मामले को एक नया मोड़ दे दिया। उन्होंने बताया कि उनका अपहरण नहीं हुआ था। रजनीश ने स्वीकार किया, “अशोक वर्मा मेरे पिता समान हैं। दो वर्ष पूर्व उन्होंने अपने 8 लाख रुपये मुझे निवेश के लिए दिए थे। मैंने वह धनराशि सूद पर एक व्यक्ति को दी, लेकिन वह व्यक्ति छह महीने पहले आत्महत्या कर चुका है। मैं अशोक वर्मा का पैसा वापस करने में असमर्थ रहा और इस कारण मैंने भयवश घर छोड़ने का निर्णय लिया।”
रजनीश ने स्पष्ट किया कि अशोक वर्मा ने कभी भी उनसे कठोरता से पैसे की मांग नहीं की, लेकिन उनके दबाव के कारण वह मानसिक तनाव में आ गए।
पुलिस ने बताया कि इस पूरे प्रकरण की सूचना न्यायालय को दी जाएगी। साथ ही, झूठे आरोप लगाकर प्रशासन को गुमराह करने और अशोक वर्मा को बदनाम करने के लिए काजल किरण शर्मा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह घटना समाज में पारिवारिक और वित्तीय संबंधों की जटिलता को उजागर करती है।















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