
आसनसोल : जिले के प्रतिष्ठित अदालत परिसर में एक अप्रत्याशित और चौंकाने वाली घटना घटी, जब एक अपराधी ने दिनदहाड़े अदालत के परिसर से एक मोटरसाइकिल चोरी करने का प्रयास किया। यह घटना उस समय हुई जब अदालत परिसर में शनिवार होने के कारण सामान्य कार्यरत कर्मचारी और वकील उपस्थित नहीं थे, जिसके चलते परिसर में भीड़ कम थी। हालांकि, अपराधी का यह प्रयास विफल हो गया और उसे गिरफ्तार कर लिया गया, जिससे एक बार फिर अदालत परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। घटना के अनुसार, दोपहर के समय आसनसोल जिला अदालत परिसर में स्थित एक मोटरसाइकिल पर चोरी का प्रयास किया गया। यह मोटरसाइकिल अदालत के एक कस्टोडियन, प्रद्युत ठाकुर की थी, जिसे वह कामकाजी समय में अदालत परिसर के पास पार्क कर गए थे। चूंकि यह शनिवार था और इस दिन अदालत में कोई महत्वपूर्ण कार्य नहीं हो रहा था, बहुत कम लोग परिसर में मौजूद थे, जिससे अपराधी को चोरी करने का मौका मिला।अपराधी ने मास्टर चाबी का उपयोग करते हुए मोटरसाइकिल के लॉक को खोलने का प्रयास किया। उसने कुछ समय तक मोटरसाइकिल के आसपास घूमते हुए स्थिति को भांपा और फिर चोरी करने की योजना को अंजाम देने का प्रयास किया। लेकिन उसकी गतिविधियों पर गौर कर रहे अदालत के हाजत प्रभारी, मोहम्मद अमीनुल इस्लाम की नजर उस पर पड़ी।

उन्होंने तुरन्त अन्य कर्मचारियों के साथ मिलकर उसे पकड़ लिया।अपराधी की पहचान देवदास राय के रूप में हुई, जो आसनसोल के ही हिरापुर थाना क्षेत्र के बर्नपुर के पुरुषोत्तमपुर का निवासी है। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपी को आसनसोल दक्षिण थाना भेज दिया, जहां रविवार को उसे न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सोमवार को उसे फिर से अदालत में पेश किया जाएगा, जहां उसकी पूछताछ के लिए रिमांड पर लेने का अनुरोध किया जाएगा। इस घटना के बाद अदालत परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। एक ओर जहां यह घटना अदालत की छुट्टी के दिन हुई, वहीं दूसरी ओर अदालत में कामकाजी दिनों के दौरान भी परिसर में सैकड़ों मोटरसाइकिलें और अन्य वाहनों की पार्किंग होती है। ऐसे में यह आशंका जताई जा रही है कि यदि सुरक्षा उपायों को सख्त नहीं किया गया तो भविष्य में इसी तरह की घटनाएं हो सकती हैं, जिनसे वाहन चोरी या अन्य अपराध हो सकते हैं।स्थानीय नागरिकों और कर्मचारियों का कहना है कि अदालत परिसर में वाहनों की पार्किंग के लिए कोई प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था नहीं है। दिनभर का काम खत्म होने के बाद जब कर्मचारी और वकील अदालत परिसर से बाहर जाते हैं, तो उनके वाहन पर किसी भी प्रकार का नियंत्रण नहीं होता।

इसके अलावा, अदालत परिसर के भीतर भी कोई नियमित सुरक्षा गार्ड की तैनाती नहीं है, जो परिसर में आने-जाने वाले लोगों की निगरानी कर सके। इस घटना ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यदि अदालत परिसर के भीतर सुरक्षा के कड़े इंतजाम न किए गए तो अपराधियों के लिए यह एक आसान लक्ष्य बन सकता है। पुलिस और प्रशासन को इस दिशा में गंभीरता से विचार करना होगा, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके और अदालत परिसर को पूरी तरह से सुरक्षित किया जा सके। इस घटना से संबंधित मामलों में अब पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और यह देखना होगा कि क्या यह कोई संगठित अपराध का हिस्सा है, और क्या अपराधी का किसी अन्य आपराधिक गिरोह से संबंध है। पुलिस का कहना है कि इस घटना के बाद और अधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता है, खासकर अदालत परिसर में सुरक्षा के संदर्भ में।















Users Today : 10
Users Yesterday : 34