
आसनसोल : आसनसोल के गोपालपुर क्षेत्र में स्थित प्रगतिशील संघ में माँ काली की दशभुजा रूप की पूजा की तैयारी जोरों पर है। इस विशेष पूजा की भव्यता एवं विशेषता के कारण दूर-दूर से भक्तगण यहाँ आने के लिए आकर्षित होते हैं। प्रगतिशील संघ के सचिव तारक मुखोपाध्याय ने बताया कि 1992 से इस पूजा की परंपरा आरंभ हुई थी, और तब से अब तक 33 वर्षों से नियमित रूप से दशभुजा काली पूजा का आयोजन किया जा रहा है।
पुराणों के अनुसार, दशभुजा मूर्ति मूलतः देवी दुर्गा की होती है, किंतु चंडी के दशभुजा रूप की पूजा का उल्लेख भी मिलता है। इसी धार्मिक मान्यता के आधार पर इस पूजा में माँ काली की दस भुजाओं के साथ प्रतिष्ठित किया जाता है। संघ के सदस्य सोमनाथ बंद्योपाध्याय के अनुसार, चंडी के इस विवरण को ध्यान में रखते हुए उन्होंने दशभुजा काली पूजा की परंपरा को स्थापित किया, जो अब इस क्षेत्र का एक प्रमुख आकर्षण बन चुका है।

हर वर्ष काली पूजा के मंडप की थीम अलग होती है, और इस वर्ष की थीम ‘मत्स्यकन्या’ रखी गई है। मंडप की सजावट इस थीम के अनुसार की जाएगी, जिसमें आकर्षक विद्युत सज्जा का समावेश किया जाएगा। इन विशेष सजावटों के बीच विभिन्न कलात्मक रचनाएँ प्रदर्शित की जाएंगी, जो दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देंगी।
काली पूजा के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है, जिसमें विभिन्न लोक कलाकार भाग लेते हैं। इस वर्ष की पूजा के लिए मूर्तियाँ तैयार करने का कार्य पुरुलिया के कुशल कुम्भकार तपन कुम्भकार द्वारा किया जा रहा है। वे इस क्षेत्र के निवासी हैं और लंबे समय से देवी मूर्तियों का निर्माण कर रहे हैं। इस समय वे मूर्ति निर्माण के अंतिम क्षणों में व्यस्त हैं, ताकि माँ काली की भव्य मूर्ति पूजा के लिए तैयार हो सके।

इस प्रकार, आसनसोल में आयोजित होने वाली काली पूजा, जो दशभुजा रूप में प्रतिष्ठित है, स्थानीय संस्कृति एवं धार्मिक आस्था का एक अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करती है, जिससे हर वर्ष भक्तजन एवं पर्यटक समान रूप से लाभान्वित होते हैं।















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