
आसनसोल : आसनसोल नगर निगम के पूर्व मेयर जितेंद्र तिवारी पर जामुड़िया के दरबा डांगा घाट स्थित पंप हाउस के निरीक्षण के दौरान बालू माफियाओं के हमले ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। इस हमले के ठीक एक दिन बाद उन्हीं पर एफआईआर दर्ज कर दी गई, जिससे मामला और अधिक गरमा गया है।
पूर्व मेयर की प्रतिक्रिया: ‘मुझ पर हमला हुआ, फिर भी मुझ पर ही एफआईआर’
इस विषय में पूर्व मेयर जितेंद्र तिवारी ने नाराजगी जताते हुए कहा कि उनके ऊपर सुनियोजित हमला किया गया, लेकिन अब नगर निगम के केजुवल कर्मचारियों द्वारा उल्टे उनके खिलाफ ही शिकायत दर्ज करा दी गई। उन्होंने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताते हुए कहा कि यह पूरी घटना साजिशन रची गई है ताकि उन्हें निशाने पर लिया जा सके।

वर्तमान मेयर की सफाई: ‘नगर निगम ने कोई एफआईआर दर्ज नहीं कराई’
जब इस विषय में आसनसोल नगर निगम के मेयर विधान उपाध्याय से सोमवार को प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि नगर निगम की ओर से जितेंद्र तिवारी या उनके सहयोगियों पर कोई शिकायत या प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई गई। उन्होंने इस पूरे विवाद को सिर्फ पब्लिसिटी स्टंट करार देते हुए कहा कि अगर किसी को कोई शिकायत है, तो उसे नियमित प्रक्रियाओं के तहत सही मंच पर समाधान की मांग करनी चाहिए।

बयानबाजी से राजनीति गरमाई, क्या यह नई राजनीतिक जंग का संकेत?
एक ओर जहां मेयर विधान उपाध्याय ने किसी भी प्रकार की एफआईआर दर्ज कराने से इनकार कर दिया, वहीं दूसरी ओर पूर्व मेयर जितेंद्र तिवारी दावा कर रहे हैं कि उनके खिलाफ ही शिकायत दर्ज कराई गई है। इस परस्पर विरोधी बयानों ने पूरे राजनीतिक परिदृश्य को और अधिक उलझा दिया है।
अब सवाल यह उठता है कि क्या यह घटना महज एक isolated incident (अलग-थलग घटना) है, या फिर यह आसनसोल शिल्पांचल में दो प्रभावशाली नेताओं के बीच एक नई राजनीतिक जंग का संकेत दे रही है? इस घटनाक्रम ने स्थानीय राजनीति में नए विवाद और ध्रुवीकरण को जन्म दे दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और तीखी बयानबाजी और राजनीतिक समीकरणों में बदलाव देखने को मिल सकता है।















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