
रानीगंज : अजय नदी से अवैज्ञानिक पद्धति द्वारा किए जा रहे बालू खनन की शिकायत मिलने पर क्षेत्रीय निरीक्षण के लिए पहुंचे भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता तथा आसनसोल के पूर्व महापौर एवं पांडवेश्वर के पूर्व विधायक जितेंद्र तिवारी को तीव्र विरोध प्रदर्शन का सामना करना पड़ा। शुक्रवार प्रातः लगभग ग्यारह बजे जैसे ही वे अपने दल-बल के साथ जमुरिया के दरबारडांगा घाट पर पहुंचे, वैसे ही स्थानीय युवकों के एक समूह ने उन्हें घेरकर विरोध जताया और “जितेंद्र तिवारी गो बैक” के नारों से वातावरण गूंज उठा।
विरोध प्रदर्शन के बीच धक्का-मुक्की, पुलिस ने संभाला मोर्चा
स्थिति कुछ ही क्षणों में तनावपूर्ण हो गई, और प्रदर्शनकारियों ने धक्का-मुक्की शुरू कर दी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जमुरिया थाना पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को नियंत्रित करने का प्रयास किया। विरोध के तीव्र स्वरूप को देखते हुए जितेंद्र तिवारी ने तत्काल घटनास्थल से प्रस्थान किया और भाजपा के नंदी स्थित पार्टी कार्यालय में शरण ली।

नेता ने जताई राजनीतिक साजिश की आशंका
इस अप्रत्याशित विरोध पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जितेंद्र तिवारी ने आरोप लगाया कि यह विरोध प्रायोजित था तथा विपक्षी दलों द्वारा कुछ युवाओं को भड़काकर उन्हें निशाना बनाया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल क्षेत्र में अवैज्ञानिक बालू खनन की समस्या का निरीक्षण करना तथा संभावित जल संकट से जनता को अवगत कराना था।
अवैध खनन से जल संकट की आशंका
जितेंद्र तिवारी ने बताया कि बिना किसी वैज्ञानिक प्रक्रिया के अंधाधुंध बालू खनन के कारण जल संकट गहराने की संभावना प्रबल हो गई है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि इस अनियमित बालू खनन पर अविलंब रोक लगाई जाए ताकि जल संसाधनों पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

कोई कानूनी कार्रवाई नहीं, पर मुद्दा गंभीर
हालांकि, इस घटना के बाद जितेंद्र तिवारी ने किसी भी कानूनी शिकायत दर्ज कराने से इनकार कर दिया और कहा कि वे जनता की समस्याओं को समझने और समाधान निकालने के पक्षधर हैं। बावजूद इसके, यह प्रकरण राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है, और अवैध बालू खनन पर प्रशासन की निष्क्रियता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर गया है।















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