
आसनसोल :; आगामी बंगाल विधानसभा चुनाव के परिप्रेक्ष्य में प्रशासनिक एवं राजनीतिक तैयारियों ने गति पकड़ ली है। इसी क्रम में पश्चिम बर्दवान जिला प्रशासन द्वारा जिला शासक कार्यालय में सर्वदलीय बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें मतदाता सूची की शुद्धता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु गहन विमर्श संपन्न हुआ। इस बैठक में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता दर्ज कराते हुए मतदाता सूची को त्रुटिहीन एवं निष्पक्ष बनाए जाने पर बल दिया।

बैठक उपरांत पत्रकारों को संबोधित करते हुए पश्चिम बर्दवान के जिला शासक एस. पोन्नंबलम ने बताया कि प्रशासन द्वारा सभी राजनीतिक दलों को एक मंच पर आमंत्रित कर मतदाता सूची की समीक्षा एवं उसमें निहित त्रुटियों को दूर करने हेतु सुझाव आमंत्रित किए गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि 6 जनवरी 2025 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची के उपरांत भी अनेक नए मतदाता ऑनलाइन पंजीकृत हुए हैं, वहीं कुछ मतदाताओं का स्थानांतरण अथवा निधन हो चुका है, जिसके कारण सूची में संशोधन आवश्यक है। बैठक में इस तथ्य पर विशेष ध्यान दिया गया कि सूची से अवांछित प्रविष्टियां हटाई जाएं तथा किसी भी प्रकार की अपारदर्शिता को समाप्त किया जाए।

राजनीतिक दलों के दृष्टिकोण से यदि परखा जाए तो बैठक में उपस्थित कांग्रेस के पश्चिम बर्दवान जिला अध्यक्ष देवेश चक्रवर्ती एवं तृणमूल कांग्रेस के महासचिव आकाश मुखर्जी ने इस मुद्दे पर प्रशासन के साथ सहमति व्यक्त करते हुए कहा कि मतदाता सूची को पूरी तरह से त्रुटिहीन और निष्पक्ष बनाने हेतु ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन पंजीकरण के कारण 6 जनवरी को जारी अंतिम मतदाता सूची में भी संशोधन की आवश्यकता बनी हुई है, क्योंकि कई स्थानों पर एक ही एपिक नंबर के तहत बहुतेक मतदाताओं का पंजीकरण पाया गया है, जिससे मतदाता सूची की प्रामाणिकता पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो सकता है।

अतीत के अनुभवों का उल्लेख करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि कई बार यह देखा गया है कि मृत व्यक्तियों अथवा स्थानांतरित मतदाताओं के नाम सूची से विलोपित नहीं किए जाते, जिससे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर संदेह उत्पन्न होता है। उन्होंने प्रशासन से अपेक्षा की कि इन सभी विसंगतियों को दूर करने हेतु ठोस एवं प्रभावी कदम उठाए जाएं ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता अक्षुण्ण बनी रहे।
इस बैठक का निष्कर्ष यही रहा कि चुनाव आयोग एवं प्रशासन द्वारा मतदाता सूची को अद्यतन कर निष्कलंक बनाया जाए, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता का विश्वास बना रहे।















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