
आसनसोल : बीबी कॉलेज के रसायन विज्ञान विभाग द्वारा एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण चार दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें खगोल विज्ञान (एस्ट्रोनॉमी) और खगोल भौतिकी (एस्ट्रोफिजिक्स) के विषय पर गहन जानकारी प्रदान की गई। इस कार्यशाला का प्राथमिक उद्देश्य विद्यार्थियों के समक्ष इन विशिष्ट वैज्ञानिक विषयों की मूलभूत अवधारणाओं एवं शोध के संभावित मार्गों को स्पष्ट करना था।

इस कार्यशाला के संचालन हेतु विशेष तौर पर गुड़गांव से आमंत्रित विशेषज्ञ द्वारा प्रतिभागी विद्यार्थियों को खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी की सूक्ष्मतत्त्वों पर सम्यक् मार्गदर्शन प्रदान किया गया। कार्यशाला में बताया गया कि इन विषयों में गहन अध्ययन और शोध के माध्यम से विद्यार्थियों के लिए कैरियर के अनंत संभावनाएँ विद्यमान हैं। इसी संदर्भ में, विशेषज्ञ ने सोशल मीडिया पर इन दोनों क्षेत्रों से सम्बंधित अनेक मिथ्या धारणाओं का खंडन करते हुए तथ्यों के आधार पर सही जानकारी प्रदान की।
उल्लेखनीय है कि इस चार दिवसीय कार्यशाला में प्रतिदिन 60 विद्यार्थियों ने सहभागिता की, जिनमें न केवल रसायन विज्ञान, बल्कि भौतिकी, गणित, भूगोल एवं कंप्यूटर विज्ञान जैसे अन्य विषयों के विद्यार्थी भी सम्मिलित हुए। इस कार्यशाला के दौरान प्रतिभागी स्वयं अपने प्रोजेक्ट्स और प्रस्तुतिकरण तैयार कर उनके माध्यम से विषय को समझने एवं समझाने का प्रयास कर रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी जैसे वैज्ञानिक विषयों से जुड़ी भ्रांतियाँ दूर की जा सकें और आमजन में इन क्षेत्रों के प्रति जागरूकता उत्पन्न हो।

कार्यक्रम के दौरान बीबी कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. अमिताभ बासु ने विद्यार्थियों को इन विषयों की महत्ता और उनके शोधात्मक महत्व के बारे में अवगत कराया। साथ ही, रसायन विज्ञान विभाग की वरिष्ठ शिक्षिका विनीता दत्ता ने भी विद्यार्थियों को मार्गदर्शन प्रदान करते हुए कहा कि यह कार्यशाला न केवल उनके ज्ञान में वृद्धि करेगी, बल्कि उनके वैज्ञानिक दृष्टिकोण और शोध में रुचि को भी प्रोत्साहित करेगी।
इस चार दिवसीय कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य वैज्ञानिक विषयों की प्रासंगिकता को विद्यार्थियों के मन में स्थापित करना और उन्हें इस क्षेत्र में शोध करने के लिए प्रेरित करना है। बीबी कॉलेज के इस महत्त्वपूर्ण प्रयास से खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी के अध्ययन के प्रति विद्यार्थियों में रुचि बढ़ाने की आशा की जा रही है, जिससे ये विषय न केवल एक शैक्षिक पाठ्यक्रम तक सीमित रहें, बल्कि एक सशक्त शोध क्षेत्र के रूप में उभरें।















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