
रानीगंज : नगर के भू-धसान प्रभावित क्षेत्रों से 300 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य पर पूर्णत: प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके साथ ही नगर निगम ने पूरे शहर में नए नक्शे पास करने पर भी रोक लगा दी है, जिससे स्थानीय नागरिकों एवं व्यवसायियों की चिंताएँ गहराती जा रही हैं। किंतु इस अचानक लिए गए निर्णय के पीछे का स्पष्ट कारण अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है।
नगर प्रशासन का कहना है कि जब तक उन्हें उच्च स्तर से आदेश प्राप्त नहीं होते, यह प्रतिबंध यथावत रहेगा। वहीं, स्थानीय नागरिक एवं व्यापारी इस निर्णय को लेकर गंभीर प्रश्न उठा रहे हैं।

भू-धसान प्रभावित क्षेत्र एवं नगर की दुर्दशा
रानीगंज बंगाल के प्राचीनतम नगरों में से एक है तथा ऐतिहासिक रूप से यह कोलकाता के बाद सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र रहा है। कभी यह आसनसोल-दुर्गापुर से भी अधिक समृद्ध था, किंतु वर्तमान में यह विकासहीनता एवं उपेक्षा का शिकार हो चुका है। शहर के तेल मिल, फ्लोर मिल, इंजीनियरिंग वर्कशॉप, बंगाल पेपर मिल, बॉन्स स्टैंडर्ड कंपनी जैसे प्रमुख उद्योग बंद हो चुके हैं। ऐसे में नक्शा पास करने पर लगी रोक ने नगरवासियों की चिंताओं को और भी गहरा कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार, आसनसोल-दुर्गापुर विकास प्राधिकरण (ADDA) ने भू-धसान प्रभावित क्षेत्रों में निर्माण कार्यों की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। लेकिन सवाल यह उठता है कि जब शहर में पहले से ही बहु-मंजिला इमारतें, स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, बैंक एवं सिनेमा हॉल निर्मित हैं, तो अब नए निर्माणों पर रोक लगाने का औचित्य क्या है?

इतिहास में दर्ज त्रासदी एवं प्रशासनिक निष्क्रियता
तीन दशक पूर्व महावीर खान कोलियरी दुर्घटना के बाद इस क्षेत्र का विस्तृत सर्वेक्षण हुआ था, जिसमें राजपाड़ा, डोमपाड़ा, हतिया तालाब, राजबाड़ी गांव, महावीर कोलियरी, दामोदर कोलियरी, अमृतनगर कोलियरी, पूरणमल क्षेत्र, कुमरबाजार, बर्न्सप्लॉट आदि को भू-धसान प्रभावित क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया गया था। तत्कालीन सांसद हाराधन राय ने इस क्षेत्र को सुरक्षित करने हेतु जनहित याचिका दायर की थी, जिसके बाद रानीगंज चेंबर ऑफ कॉमर्स के समक्ष एवं अन्य क्षेत्रों में सैंड फिलिंग (रेत भराई) कराई गई, किंतु यह प्रयोग असफल साबित हुआ।
नक्शा पास करने पर रोक : शहर के भविष्य पर संकट
सूत्रों का दावा है कि केंद्र सरकार के कोयला मंत्रालय द्वारा एडीडीए को पत्र भेजकर निर्देशित किया गया था कि रानीगंज सहित आसनसोल-दुर्गापुर क्षेत्र में भू-धसान प्रभावित क्षेत्र से 300 मीटर के दायरे में कोई भी निर्माण कार्य न किया जाए। इसके आधार पर अप्रैल 2023 में एक आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई थी।
रानीगंज चेंबर ऑफ कॉमर्स, सिटीजंस फोरम एवं अन्य संस्थाओं की निष्क्रियता पर भी सवाल उठ रहे हैं। व्यवसायियों का कहना है कि इन संगठनों को नागरिकों को जागरूक करना चाहिए, किंतु अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

रानीगंज चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष रोहित खेतान ने कहा कि हमने संबंधित विभागों से स्पष्टीकरण मांगा है, किंतु अब तक कोई ठोस उत्तर नहीं मिला। व्यापारियों का मानना है कि शहर का बहुमुखी विकास ठप हो चुका है और इस निर्णय से यह और भी बाधित होगा।
प्रशासन से जवाबदेही की मांग
नागरिकों का कहना है कि प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि 300 मीटर की सीमा किस वैज्ञानिक आधार पर तय की गई है तथा इस प्रतिबंध से शहर के विकास पर क्या प्रभाव पड़ेगा। नगर निगम अध्यक्ष अमरनाथ चटर्जी ने कहा कि यह समस्या अस्थायी है और जल्द ही समाधान निकाला जाएगा।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस निर्णय पर पुनर्विचार करता है या नहीं, अथवा रानीगंज को विकासहीनता की ओर और धकेल दिया जाएगा।















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