

आसनसोल : आगामी 3 नवंबर को बहुला में काली पूजा के अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम में भोजपुरी गायक पवन सिंह के आमंत्रण को लेकर बांग्ला पोखो संगठन ने विरोध की भावना व्यक्त की है। संगठन के महासचिव गर्ग चटर्जी और पश्चिम बर्दवान जिला इकाई के सचिव अक्षय बनर्जी ने स्पष्ट रूप से यह कहा है कि पवन सिंह को बंगाल की पवित्र भूमि पर कार्यक्रम करने का अवसर नहीं दिया जाएगा। संगठन के अनुसार, पवन सिंह पर यह आरोप है कि उन्होंने अपने गीतों में बंगाली महिलाओं का अश्लील चित्रण किया है और उन्हें भोग-विलास की वस्तु के रूप में प्रस्तुत किया है, जिससे बंगाली समाज की मर्यादा पर गंभीर आघात पहुँचा है।

बांग्ला पोखो संगठन का यह विरोध, लोकसभा चुनाव 2024 की पृष्ठभूमि में भी गहरा है, जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पवन सिंह को आसनसोल लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया था। उस समय भी बंगाली समाज द्वारा तीव्र विरोध किया गया था और तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने इस पर अपना विरोध जताया था। इस विरोध के कारण भाजपा ने अंततः पवन सिंह को प्रत्याशिता से हटा दिया था। संगठन का मानना है कि अब वही पवन सिंह, जो बंगाली समाज की भावनाओं को ठेस पहुँचा चुके हैं, जामुड़िया के टीएमसी विधायक हरेराम सिंह के आमंत्रण पर बहुला में कार्यक्रम के लिए बुलाए गए हैं। इस स्थिति ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तनाव की स्थिति उत्पन्न कर दी है।
संगठन के सदस्यों ने यह चेतावनी दी है कि वे इस विषय पर कानूनी कार्रवाई का मार्ग अपनाएंगे और इस संबंध में आसनसोल दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट को ज्ञापन सौंपा जाएगा। बांग्ला पोखो संगठन का कहना है कि पवन सिंह को बंगाल की भूमि पर कदापि कार्यक्रम करने का अवसर नहीं दिया जाएगा, और वे इसके लिए हर संभव प्रयास करेंगे।

वहीं, इस विषय पर विधायक हरेराम सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि पवन सिंह एक प्रसिद्ध कलाकार हैं और उन पर लगाए गए आरोप केवल जाति-विभेद फैलाने के प्रयास मात्र हैं। विधायक का मानना है कि पवन सिंह को एक कलाकार के रूप में देखा जाना चाहिए और उनके कार्यक्रम में किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि 3 नवंबर को पवन सिंह का कार्यक्रम पूरी तरह सुनिश्चित है और इसे रद्द करने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता।
इस पूरे घटनाक्रम से स्पष्ट है कि जामुड़िया के बहुला क्षेत्र में आगामी 3 नवंबर को आयोजित होने वाले कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक और सामाजिक तनाव बढ़ रहा है। अब देखना यह होगा कि क्या पवन सिंह का यह कार्यक्रम शांतिपूर्वक सम्पन्न हो पाता है या विरोध की आंधी इसे अपने गिरफ्त में ले लेती है।















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