बर्दवान मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक अनोखा चमत्कार, 24 घंटे में नौ जोड़ी जुड़वां बच्चों का जन्म

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पूर्व बर्दवान :  बर्दवान मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बीते 24 घंटों में एक अभूतपूर्व और अनोखी घटना घटित हुई है, जिसमें एक या दो नहीं, बल्कि नौ जोड़ी जुड़वां शिशुओं ने जन्म लिया। इस प्रकार की अद्वितीय घटना ने अस्पताल के चिकित्सा विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया है और यह पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गई है। जहां सामान्यतः जुड़वां शिशुओं का जन्म अपेक्षाकृत दुर्लभ घटना मानी जाती है, वहीं एक ही दिन में इतने जुड़वां शिशुओं का जन्म लेना अत्यंत असाधारण और दुर्लभ है।

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बर्दवान मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पिछले 24 घंटों के दौरान 18 नवजातों का जन्म हुआ, जिसमें 9 जोड़ी जुड़वां बच्चे सम्मिलित हैं। अस्पताल के प्रसूति विभाग के प्रमुख डॉ. मलय सरकार ने इस घटना को चिकित्सा इतिहास में दुर्लभ करार देते हुए बताया कि सांख्यिकी के अनुसार, सामान्यतः 80 में से एक महिला जुड़वां शिशुओं को जन्म देती है, लेकिन एक ही दिन में इतने जुड़वां शिशुओं का जन्म लेना अविश्वसनीय है। यह अस्पताल, जो एक रेफरल अस्पताल है, में डिलीवरी अत्यधिक जटिल मानी जाती है, और जुड़वां बच्चों का जन्म विशेष रूप से जोखिमपूर्ण होता है।अस्पताल प्रशासन के अनुसार, 18 शिशुओं में से 11 लड़कियां और 7 लड़के हैं। एक को छोड़कर शेष सभी प्रसव सिजेरियन सेक्शन के माध्यम से संपन्न हुए। अस्पताल के अधीक्षक डॉ. तापस घोष ने पुष्टि की कि सभी मांएं और बच्चे स्वस्थ हैं। हालांकि, चार नवजात शिशुओं का वजन अपेक्षाकृत कम होने के कारण उन्हें एनआईसीयू (नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट) में विशेष देखभाल के अंतर्गत रखा गया है। इसके बावजूद उनकी शारीरिक स्थिति स्थिर बनी हुई है, जो एक सकारात्मक संकेत है।इस अद्वितीय घटना के दौरान अस्पताल के सभी चिकित्सक, नर्सें और चिकित्सा कर्मियों ने अत्यंत कौशल और धैर्य के साथ इस चुनौतीपूर्ण कार्य को सफलतापूर्वक निष्पादित किया है। डॉ. सुप्रतीक बोस ने बताया कि नवजात शिशुओं का औसत वजन 2 किलो से 2.2 किलो के बीच है,

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जो सामान्य श्रेणी के अंतर्गत आता है। कुछ नवजातों के माता-पिता बांकुरा, हुगली और नादिया जिलों से संबंध रखते हैं, जबकि पूर्व बर्दवान के दो प्रसिद्ध प्रसूति विशेषज्ञ भी इस अनूठी घटना का हिस्सा बने। यह घटना न केवल चिकित्सा क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित करती है, बल्कि इसने बर्दवान जिले और आसपास के इलाकों में जुड़वां शिशुओं के जन्म के बारे में जागरूकता और उत्सुकता भी बढ़ाई है।

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