चर्यापद की नाट्य प्रस्तुति “लज्जा” का स्वर्णिम पचासवां मंचन

Facebook
Twitter
WhatsApp

ghanty

आसनसोल :  देवपक्ष के आरंभ में, आसनसोल के प्रतिष्ठित रविंद्र भवन में चर्यापद की महत्त्वपूर्ण नाट्य प्रस्तुति “लज्जा” ने अपने पचासवें मंचन का गौरवपूर्ण इतिहास रचा। संपूर्ण पश्चिम बंगाल में इस नाटक ने अपनी जगह बनाई है, और 50 सफल मंचनों के साथ इसे असाधारण सफलता मिली है। “लज्जा” का प्रथम मंचन 26 दिसंबर, 2015 को हुआ था, जो प्रारंभिक रूप से एक परीक्षण स्वरूप में प्रस्तुत किया गया था। आठ वर्षों की गहन अनुसंधान और विविध यथार्थ घटनाओं से प्रेरित यह नाटक महिलाओं के विरुद्ध हो रहे अत्याचारों, विशेष रूप से बलात्कार के विरुद्ध मुखरता से आवाज उठाता है।

IMG 20240910 WA0035

“लज्जा” नाटक का प्रमुख संदेश यह है कि समाज में हो रहे बलात्कार का कलंक नारी पर नहीं, बल्कि पुरुष पर है। जब-जब कहीं भी इस पापकर्म का काला साया धरती पर पड़ता है, वह कलंक पुरुषों के मुखमंडल पर अंकित हो जाता है। नाटककारों का आह्वान है कि पुरुषों को इस लज्जा का बोझ उठाना चाहिए और उनके इस लज्जित होने से ही महिलाएं समाज में सुरक्षित रह सकेंगी। नाटक के निर्देशक रुद्र प्रसाद चक्रवर्ती ने इस भावनात्मक संदेश को गहराई से नाट्य के रूप में उतारा है।

IMG 20240918 WA0025

“लज्जा” को प्रस्तुत करते हुए कलाकारों को जहां एक ओर आलोचनाओं का सामना करना पड़ा, वहीं दूसरी ओर नाटक को अपार दर्शक-प्रेम और सहानुभूति प्राप्त हुई। इस नाटक को दर्शकों का अद्वितीय स्नेह और प्रोत्साहन मिला है, जिसने इस मफस्सली नाट्य प्रस्तुति को सम्पूर्ण बंगाल में प्रतिष्ठा दिलाई है और अनेक सम्मान प्राप्त किए हैं। चर्यापद ने उन सभी दर्शकों के प्रति आभार व्यक्त किया है, जिन्होंने इस प्रस्तुति को अपनाया और इसे अपने स्नेह से समृद्ध किया।

बावजूद इसके कि कोविड महामारी के समय में नाटक की प्रस्तुति को बाधित करना पड़ा, “लज्जा” ने अपने नवीनतम रूप में पुनः आसनसोल की धरती पर वापसी की है। नाट्य के इस नवीन संस्करण में नए दृष्टिकोण और नए तत्व जोड़े गए हैं, जो दर्शकों को एक अलग और गहन अनुभव प्रदान करते हैं।

IMG 20241018 WA0121

इस नाटक के 50वें मंचन में जिन प्रमुख कलाकारों ने योगदान दिया, उनमें सायंती चट्टोपाध्याय, कृतिदीपन दाशशर्मा, शुभदीप चौधरी, राजेश पात्र, पल्लव गोस्वामी, संतु भट्टाचार्य, ऐषी कर, कोयना चक्रवर्ती, अनुष्का डे, संजय पाठक, शुचिस्मिता दासगुप्ता, प्रियांशु बसु मजुमदार, पार्थ सारथी कर, इंद्रदीप कोणार और निर्देशक रुद्र प्रसाद चक्रवर्ती शामिल हैं। अब तक कुल 37 कलाकार इस नाटक से जुड़ चुके हैं, जो इसे समय-समय पर नई ऊंचाइयों पर ले गए हैं।

Leave a Comment

Leave a Comment

[democracy id="1"]

Share Market

Also Read This

Gold & Silver Price

Our Visitor

0 4 1 6 1 1
Users Today : 5
Users Yesterday : 22