
जामुड़िया : ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) के कुनुस्तोड़िया क्षेत्र स्थित बेलबाद कोलियरी में डीओ (डिलीवरी ऑर्डर) कोयला लोडिंग को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। क्षेत्र में व्याप्त तनाव और विरोध प्रदर्शनों के चलते लोडिंग कार्य पूर्णतः बाधित हो गया है। स्थानीय श्रमिकों का स्पष्ट आरोप है कि डीओ लोडिंग प्रक्रिया बाहरी तत्वों के हाथों में चली गई है, जिससे क्षेत्रीय श्रमिकों के रोजगार पर संकट मंडरा रहा है।
स्थानीय श्रमिकों का आक्रोश, मैन्युअल लोडिंग की मांग
सोमवार को बेलबाद कोलियरी के स्थानीय श्रमिकों ने तृणमूल कांग्रेस का झंडा लेकर एकजुट प्रदर्शन किया और डीओ लोडिंग के लिए आने वाले वाहनों को रोक दिया। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग यह है कि कोयले की लोडिंग पूरी तरह मैन्युअल रूप से कराई जाए, ताकि स्थानीय मजदूरों को रोजगार का अवसर प्राप्त हो। श्रमिकों का आरोप है कि डीओ लोडिंग के अंतर्गत बाहरी तत्वों को अनुचित लाभ दिया जा रहा है, जबकि स्थानीय श्रमिकों को बेरोजगार कर दिया गया है।

शनिवार को डीओ लोडिंग के दौरान तीन ट्रकों में तोड़फोड़ की घटना सामने आई थी, जिससे क्षेत्र में पहले से व्याप्त तनाव और अधिक बढ़ गया। इसी कड़ी में, सोमवार को पुनः स्थानीय निवासियों ने लोडिंग कार्य पूरी तरह ठप कर दिया और डीओ लोडिंग प्रक्रिया में हो रही अनियमितताओं के विरुद्ध नारेबाजी की।

प्रदर्शनकारियों के आरोप : बाहरी तत्वों को दी जा रही प्राथमिकता
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बेलबाद कोलियरी में कोयला लोडिंग का कार्य ठेके पर बाहरी लोगों को दिया गया है। इस प्रक्रिया में स्थानीय श्रमिकों को पूर्णतः दरकिनार कर दिया गया है, जिससे उनके जीवन-यापन पर संकट उत्पन्न हो गया है। आक्रोशित लोगों का आरोप है कि लोडिंग के दौरान बाहरी गुंडों को बुलाकर कोयला लोडिंग करवाई जाती है, जिससे स्थानीय मजदूरों को जबरन हटा दिया जाता है।
इतना ही नहीं, विरोध करने वाले स्थानीय श्रमिकों पर झूठे मुकदमे दर्ज कराए जा रहे हैं और पुलिस प्रशासन द्वारा उन्हें अनावश्यक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। विरोध प्रदर्शन में शामिल एक स्थानीय निवासी राजवीर सिंह ने कहा कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगों को शीघ्र स्वीकार नहीं किया तो आंदोलन और उग्र होगा।
रंगदारी और रोजगार की लड़ाई में उलझी कोयला लोडिंग
बेलबाद कोलियरी में डीओ लोडिंग के नाम पर रंगदारी वसूली का खेल भी चरम पर है। इस कारण रेलवे साइडिंगों पर कोयला लोडिंग पूरी तरह बाधित हो गई है। एक ओर जहां कथित रंगदार लोडिंग कंपनियों पर दबाव बना रहे हैं, वहीं स्थानीय ग्रामीणों की जिद है कि कोयला लोडिंग मैन्युअली हो, ताकि रोजगार के अवसर सुरक्षित रहें।
स्थिति इतनी जटिल हो गई है कि अब कंपनियों के सामने यह दुविधा उत्पन्न हो गई है कि वे रंगदारों की मांग मानें या ग्रामीणों की। सूत्रों के अनुसार, कोलियरी क्षेत्र में रंगदारी वसूली को लेकर अंदरखाने बातचीत चल रही है, किंतु स्थानीय श्रमिकों की समस्याओं का कोई समाधान नहीं निकल रहा है, जिससे क्षेत्र में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
ईसीएल प्रशासन पर चुप्पी साधने का आरोप
स्थानीय श्रमिकों का यह भी आरोप है कि ईसीएल प्रबंधन इस पूरे घटनाक्रम पर चुप्पी साधे बैठा है। जबकि, हर दिन लोडिंग कार्य बाधित होने से उत्पादन प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है। प्रशासन से इस विषय में कई बार शिकायत की गई, किंतु अब तक कोई संतोषजनक समाधान नहीं निकला।

विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा, पुलिस की तैनाती बढ़ी
विरोध प्रदर्शन के कारण डीओ लोडिंग कार्य पूरी तरह प्रभावित रहा। जैसे ही इसकी सूचना प्रशासन को मिली, पुलिस बल मौके पर पहुंच गया और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। किंतु स्थानीय श्रमिकों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया गया है कि उनकी मांगों पर विचार किया जाएगा। किंतु, स्थानीय श्रमिक इससे संतुष्ट नहीं हैं और उन्होंने संघर्ष जारी रखने की चेतावनी दी है।
माफियाओं की साजिश, राजनीतिक दखल बढ़ा
बेलबाद कोलियरी में डीओ लोडिंग की प्रक्रिया को लेकर माफियाओं के बीच वर्चस्व की जंग तेज हो गई है। बताया जाता है कि रंगदारी वसूली की इस होड़ में कई बड़े राजनीतिक चेहरे भी सक्रिय हो गए हैं। यही कारण है कि स्थानीय लोगों की समस्याओं को दरकिनार कर माफियाओं को संरक्षण दिया जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम ने डीओ कोयला लोडिंग को लेकर एक नए विवाद को जन्म दे दिया है। कोयला लोडिंग पर अधिकार जमाने के लिए माफिया गुटों में अंदरूनी खींचतान तेज हो गई है, जिससे स्थिति और भी जटिल होती जा रही है।
संकट गहराया, समाधान अनिश्चित
बेलबाद कोलियरी में डीओ लोडिंग को लेकर चल रहा यह संघर्ष प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है। जहां स्थानीय श्रमिक अपने अधिकारों के लिए संघर्षरत हैं, वहीं माफिया गिरोह अपनी सत्ता स्थापित करने के लिए जोड़-तोड़ में लगे हैं।
यदि प्रशासन ने शीघ्र हस्तक्षेप नहीं किया तो यह विवाद और अधिक विकराल रूप ले सकता है, जिससे कोयला लोडिंग से जुड़े समस्त कार्य पूर्णतः ठप हो सकते हैं। स्थानीय श्रमिकों का स्पष्ट कहना है कि जब तक उन्हें मैन्युअल लोडिंग का अवसर नहीं मिलेगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।















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