
आसनसोल : पश्चिम बर्दवान जिले के सलानपुर ब्लॉक में लगभग साढ़े तीन हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती होती है। कटाई के पश्चात्, इन खेतों में शेष रह गए फसल अवशेषों (खड़) को जलाना एक सामान्य प्रवृत्ति रही है, जिससे पर्यावरणीय प्रदूषण के साथ-साथ वायुमंडल में तापमान की वृद्धि भी होती है। इस समस्या का समाधान निकालने और किसानों को इस हानिकारक अभ्यास से दूर रखने हेतु कृषि विभाग ने एक विशेष पहल की है।
आज कृषि विभाग के उपनिदेशक श्री जाहिर उद्दीन खान के नेतृत्व में सलानपुर ब्लॉक कृषि कार्यालय के अधिकारी श्री राजर्षि बैनर्जी एवं अन्य अधिकारियों ने अल्लाडी ग्राम पंचायत के कालीपाथर क्षेत्र में एक जागरूकता रैली का आयोजन किया। इस रैली से पूर्व किसानों की सहभागिता से एक बैठक का आयोजन भी किया गया जिसमें लगभग 50 कृषकों ने भाग लिया।

कृषि विभाग के अधिकारियों ने इस बैठक में किसानों को फसल अवशेषों के निस्तारण के प्रभाव और विकल्पों के बारे में विस्तारपूर्वक समझाया। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन, विशेषकर गाय और भैंस पालन, में कमी आने के कारण खड़ की मांग में भारी गिरावट देखी जा रही है। इस स्थिति में खड़ को जलाने के बजाय इसका उपयोग जैविक खाद निर्माण हेतु करने का सुझाव दिया गया। कृषि विभाग ने इसे एक उपयोगी समाधान बताते हुए किसानों को इसे अपनाने के लिए प्रेरित किया, जिससे न केवल खेत में पड़ी खड़ का सदुपयोग हो सके, बल्कि इससे प्राप्त जैविक खाद से भविष्य की फसलों में पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ाई जा सके।
जैविक खाद बनाने की प्रक्रिया के विषय में जानकारी देते हुए अधिकारियों ने बताया कि इससे पर्यावरणीय प्रदूषण में कमी आएगी और खेतों की उर्वरकता भी बेहतर होगी। उन्होंने इस बात पर भी विशेष जोर दिया कि खेत में बची खड़ को किसी भी स्थिति में न जलाया जाए। उन्होंने किसानों को इस तकनीक को अपनाने के फायदे गिनाए और उन्हें इस प्रक्रिया के प्रति प्रोत्साहित किया।

इस जागरूकता अभियान के दौरान किसान समुदाय को इस विषय में पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी अवगत कराया गया। उन्हें बताया गया कि खड़ जलाने से वायुमंडल में हानिकारक गैसों का उत्सर्जन होता है, जो न केवल वायु प्रदूषण का कारण बनता है, बल्कि तापमान में भी अप्रत्याशित वृद्धि का कारक है। इस प्रकार, खड़ को जैविक खाद में बदलने से न केवल प्रदूषण नियंत्रित होगा, बल्कि इससे भूमि की पोषकता भी बढ़ेगी, जिससे भविष्य में धान और अन्य फसलों की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।
बैठक और जागरूकता रैली से किसानों ने प्रेरणा प्राप्त की और कृषि अधिकारियों की इस पहल की सराहना की। माना जा रहा है कि इस अभियान के पश्चात् किसानों में एक सकारात्मक सोच विकसित होगी, और वे फसल अवशेष जलाने की प्रथा को त्यागकर इसे जैविक खाद बनाने में उपयोग करेंगे, जिससे क्षेत्र में सतत कृषि का मार्ग प्रशस्त होगा।















Users Today : 9
Users Yesterday : 34