
आसनसोल : विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट 2024 के निष्कर्षों ने भारत के औद्योगिक नगरों में वायु प्रदूषण की भयावह स्थिति को उजागर कर दिया है। स्वीडन की प्रतिष्ठित आईक्यू एयर संस्था द्वारा जारी इस रिपोर्ट में भारत के 11 शहरों को विश्व के 20 सर्वाधिक प्रदूषित नगरों की सूची में सम्मिलित किया गया है। इन आंकड़ों के अनुसार, भारत के 35% शहरी क्षेत्रों में पीएम 2.5 प्रदूषक तत्वों की वार्षिक औसत सांद्रता विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 10 गुना अधिक पाई गई है।
दुर्गापुर-आसनसोल में वायु प्रदूषण की भयावहता
पश्चिम बंगाल के प्रमुख औद्योगिक नगर दुर्गापुर और आसनसोल प्रदूषण के सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों में गिने जा रहे हैं। इन नगरों में बढ़ते वायुमंडलीय प्रदूषण के मूल कारणों में कोयला खनन, लौह एवं इस्पात उद्योगों से निकलने वाला धुआं, भारी वाहन यातायात, निर्माण कार्यों से उड़ती धूल और अव्यवस्थित नगरीयकरण प्रमुख हैं। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के अनुसार, इन शहरों में पीएम 2.5 प्रदूषकों का स्तर लगातार खतरनाक सीमा से ऊपर बना हुआ है, जिससे जनस्वास्थ्य पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, पीएम 2.5 वे सूक्ष्म कण होते हैं जिनका आकार 2.5 माइक्रोन से भी कम होता है। ये कण श्वसन तंत्र में प्रवेश कर रक्त प्रवाह तक पहुंच सकते हैं, जिससे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, हृदय रोग, फेफड़ों के संक्रमण और कैंसर जैसी घातक बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है। दुर्गापुर व आसनसोल में इस प्रकार के प्रदूषण का स्तर चिंताजनक रूप से बढ़ रहा है, जो आगामी समय में जनसामान्य के लिए घातक सिद्ध हो सकता है।
भारत में प्रदूषण की स्थिति
इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत वर्तमान में विश्व का पांचवां सर्वाधिक प्रदूषित देश बन गया है, जबकि वर्ष 2023 में यह तीसरे स्थान पर था। दिल्ली, जो वर्षों से प्रदूषण का प्रमुख केंद्र बनी हुई है, अब भी विश्व की सर्वाधिक प्रदूषित राजधानी के रूप में सूचीबद्ध है, जहां पीएम 2.5 का वार्षिक औसत घनत्व 91.6 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर दर्ज किया गया है।
हालांकि रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि 2023 की तुलना में 2024 में भारत में वायु प्रदूषण में 7% की गिरावट दर्ज की गई है, किंतु यह कमी पर्याप्त नहीं मानी जा सकती। औद्योगिक नगरों एवं महानगरों में प्रदूषण का स्तर अब भी अत्यंत चिंताजनक बना हुआ है, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है।

प्रदूषण नियंत्रण हेतु आवश्यक उपाय
वातावरणीय विशेषज्ञों का मत है कि यदि वायु प्रदूषण पर शीघ्र अति शीघ्र नियंत्रण नहीं किया गया तो दुर्गापुर, आसनसोल सहित पश्चिम बंगाल के कई औद्योगिक शहरों में रहना दूभर हो जाएगा। प्रशासन एवं सरकार को इस विकट समस्या के समाधान हेतु निम्नलिखित उपायों को प्राथमिकता देनी होगी—
औद्योगिक इकाइयों में प्रदूषण नियंत्रण यंत्रों की अनिवार्यता एवं कठोर अनुपालन। कोयला आधारित उद्योगों पर नियंत्रण तथा हरित ऊर्जा विकल्पों को बढ़ावा।इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित कर डीजल एवं पेट्रोल वाहनों की निर्भरता कम करना। नगरीय हरित क्षेत्र में वृद्धि एवं वृक्षारोपण अभियान को बढ़ावा देना।निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण हेतु नियमित जल छिड़काव एवं सुरक्षा उपाय लागू करना। सख्त वायु प्रदूषण नियंत्रण नीतियों को लागू कर सतत निगरानी प्रणाली विकसित करना।
यदि शीघ्र ही प्रभावी नीति एवं कड़े नियमों का क्रियान्वयन नहीं किया गया, तो यह संकट भविष्य में और विकराल रूप धारण कर सकता है। अतः सरकार, प्रशासन एवं नागरिकों को एकजुट होकर वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।















Users Today : 17
Users Yesterday : 23