श्रमिक आंदोलन पर मुख्यमंत्री के प्रतिबंध के बावजूद, कारखाने के श्रमिक नेता शेख रमजान अली और उनके अनुयायियों और श्रमिक नेताओं ने आंदोलन में भाग लिया

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दुर्गापुर : मुख्यमंत्री के प्रतिबंध के बावजूद दुर्गापुर के सागरभंगा कॉलोनी में तृणमूल श्रमिक संगठन की इकाई ने एक बार फिर उग्रवादी आंदोलन पर भरोसा जताया है l बुधवार की सुबह से ही ग्रेफाइट इंडिया नामक इस निजी फैक्ट्री के मुख्य गेट को अंदर से बंद कर दिया गया और विभिन्न मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया l इस दौरान अधिकारी रोजाना की तरह फैक्ट्री के मुख्य गेट से प्रवेश कर रहे थे, जैसे ही कार अंदर घुसी तो पत्रकार तस्वीरें नहीं ले सके, कार रोककर विरोध शुरू हो गया। हालांकि पार्टी का झंडा हाथ में नहीं दिखा, लेकिन इस निजी फैक्ट्री के तृणमूल श्रमिक नेता शेख रमजान अली, जिन पर पार्टी के पश्चिम बर्दवान जिला नेतृत्व को भरोसा है, ने विरोध स्थल पर मौजूद थे l तो क्या ये मजदूर नेता पार्टी सुप्रीमो के सख्त निर्देशों को चुनौती दे रहे हैं??? गेट खोलने की मांग को लेकर मजदूरों का एक समूह फैक्ट्री के दूसरे गेट के सामने गुस्से में आ गया, जिसके बाद जिला भाजपा और कांग्रेस नेतृत्व ने जवाब दिया कि यह आंदोलन उद्योग को बंगाल से दूर कर देगा l समस्याएँ हो सकती हैं, श्रमिकों के हितों के लिए विरोध प्रदर्शन हो सकते हैं, लेकिन एक कारखाने के मुख्य द्वार को अवरुद्ध करके और अधिकारियों के वाहनों के प्रवेश को रोककर नहीं l वे बंगाल में उद्योग के लिए प्रतिकूल माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। आंदोलन हो सकता है, लेकिन यह उग्रवादी आंदोलन कभी भी तृणमूल श्रमिक नेतृत्व के नेतृत्व का समर्थन नहीं करता है l कुल मिलाकर पूरे घटनाक्रम में एक बार फिर तृणमूल श्रमिक नेतृत्व की विडंबना सामने आई है l तो क्या नेता के उग्रवादी आंदोलन पर प्रतिबंध की जवाबी चुनौती दुर्गापुर के तृणमूल श्रमिक नेतृत्व की है???? उद्योग विहीन बंगाल में यह अशुभ संकेत तो नहीं???

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