
रानीगंज : बंगाल में हाल ही में सामने आए फर्जी प्रशासनिक अधिकारी की घटना ने पूरे राज्य में हड़कंप मचा दिया था। अब ऐसा प्रतीत हो रहा है कि आसनसोल नगर निगम के 34 नंबर वार्ड के सियारसोल क्षेत्र में एक फर्जी दुर्गा पूजा कमेटी का गठन हो गया है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, ‘सीआरसोल जूनियर सर्वजनिन दुर्गा पूजा कमेटी’ नामक एक पूजा समिति कथित रूप से अस्तित्व में आई है और उसे राज्य सरकार से 85,000 रुपये का अनुदान भी मिल चुका है।इस संबंध में जब क्षेत्र के कुछ वरिष्ठ नागरिकों से वार्ता की गई, तो उन्होंने बताया कि वे पिछले कई दशकों से इस क्षेत्र में निवास कर रहे हैं, लेकिन उन्हें इस दुर्गा पूजा कमेटी के बारे में कोई जानकारी नहीं है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि यह कमेटी केवल कागजों पर है और असल में इसका कोई अस्तित्व नहीं है। इसके बावजूद, जब उनसे पूछा गया कि यदि यह कमेटी अस्तित्व में नहीं है, तो इसे पुलिस के माध्यम से कैसे अनुदान प्राप्त हुआ, तो किसी के पास स्पष्ट उत्तर नहीं था।जब 34 नंबर वार्ड के पार्षद रणजीत सिंह से इस मामले पर चर्चा की गई, तो उन्होंने भी इस नाम से किसी पूजा कमेटी के अस्तित्व से इनकार किया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में तीन प्रमुख स्थानों पर दुर्गा पूजा होती है: गोल बागान, राजबाड़ी मैदान, और राम बागान पंजाबी मोड़। रणजीत सिंह ने पुष्टि की कि उन्हें ‘सीआरसोल जूनियर सर्वजनिन दुर्गा पूजा कमेटी’ के बारे में कोई जानकारी नहीं है।पत्रकारों ने जब पूछा कि अगर पार्षद होने के बावजूद उन्हें इस कमेटी के बारे में जानकारी नहीं है, तो सरकारी अनुदान का धन कैसे मिला, तो उन्होंने बताया कि यह अनुदान राशि पुलिस के माध्यम से दी जाती है और संभवतः पुलिस ने इसकी जांच की होगी।हालांकि, एक महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि यदि इस प्रकार की कोई पूजा कमेटी वास्तव में है, तो स्थानीय निवासियों और पार्षद को इसके बारे में जानकारी क्यों नहीं है? क्या हम इसे फर्जी मान लें और सरकारी अनुदान की राशि का दुरुपयोग हो रहा है? इसके अतिरिक्त, क्या इस मामले में केवल पूजा कमेटी के पदाधिकारी ही शामिल हैं या इसमें प्रशासन के अधिकारी भी सम्मिलित हैं?स्थानीय नागरिकों का मानना है कि इस प्रकार की घटनाओं की पारदर्शिता से जांच होनी चाहिए। यदि यह पाया जाता है कि कोई फर्जी पूजा कमेटी अस्तित्व में नहीं है, तो इसके पदाधिकारियों को कठोर सजा मिलनी चाहिए, और यदि प्रशासन के किसी अधिकारी की संलिप्तता पाई जाती है, तो उनके खिलाफ भी कड़ी कानूनी कार्रवाई आवश्यक है। ऐसा प्रतीत होता है कि यदि वाकई में फर्जी पूजा कमेटी बनाकर अनुदान राशि का दुरुपयोग किया गया है, तो प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत अनिवार्य रूप से संदिग्ध है।
















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