
बर्नपुर : सेल आईएसपी में पिछले दिनों हड़ताल के समर्थन में भाग लेने वाले कर्मचारियों को प्रबंधन की ओर से चेतावनी पत्र भेजा जा रहा है। स्थायी कर्मियों के साथ-साथ ठेका कर्मियों को भी ठेका कंपनियों के माध्यम से शोकॉज नोटिस भेजा गया है। इस अप्रत्याशित कदम पर कर्मचारियों ने कटाक्ष करते हुए इसे प्रबंधन का ‘दिवाली उपहार’ करार दिया है।गौरतलब है कि लंबित एरियर भुगतान और बोनस के मुद्दे पर पांच केंद्रीय श्रमिक संगठनों द्वारा आहूत इस्पात उद्योग की हड़ताल में कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी रही थी। इस हड़ताल को लेकर प्रबंधन ने पहले से ही कठोर रुख अपनाया हुआ था और कर्मचारियों के प्रचार-प्रसार पर नजर बनाए हुए था। आईएसपी में हड़ताल का व्यापक असर देखा गया, हालांकि प्रबंधन का दावा है कि उत्पादन में कोई उल्लेखनीय गिरावट नहीं आई। हड़ताल के बावजूद प्रबंधन ने सख्त कदम उठाते हुए अब कर्मचारियों को चेतावनी पत्र जारी कर दिया है।


इंटक यूनियन के संयुक्त सचिव गुरदीप सिंह को भेजे गए चेतावनी पत्र में उल्लेख किया गया है कि 26 अक्टूबर, 2024 को प्रातः लगभग 10:30 से 11:00 के बीच, उन्होंने प्लांट परिसर के भीतर मोटरसाइकिल रैली में भाग लिया और अन्य कर्मचारियों को कार्य से विरत रहने हेतु उकसाया। पत्र में इसे अनुशासनहीनता करार देते हुए कंपनी के प्रमाणित स्थायी आदेशों के खंड 25(viii), (xvi), और (xxiv) के उल्लंघन का मामला माना गया है।प्रबंधन द्वारा उद्धृत इन खंडों में निम्नलिखित बातों का उल्लेख है:खंड 25(viii): कार्यस्थल से बिना अनुमति के अनुपस्थित रहना।खंड 25(xvi): कार्यस्थल के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए अन्य कर्मचारियों को हड़ताल के लिए प्रेरित करना। खंड 25(xxiv): प्रबंधन की अनुमति के बिना प्लांट परिसर में किसी प्रकार की बैठक का आयोजन करना। पत्र में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि भविष्य में इस प्रकार की गतिविधियों में वे संलिप्त पाए गए, तो उनके खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

ठेका कर्मियों को भी इसी कड़ी में शोकॉज नोटिस जारी किया गया है, जिसमें 72 घंटों के भीतर जवाब देने को कहा गया है। शोकॉज पत्र में ठेका कर्मचारियों से पूछा गया है कि कठिन समय में जब कंपनी को उनकी सख्त आवश्यकता थी, वे अनुपस्थित क्यों रहे। प्रबंधन ने इस नोटिस में चेतावनी दी है कि जवाब संतोषजनक न पाए जाने पर उनके खिलाफ आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं।
इस सख्ती से कर्मचारियों के बीच असंतोष और भी बढ़ गया है। यूनियन नेताओं ने इसे कर्मचारियों के अधिकारों का हनन बताते हुए विरोध दर्ज कराया है। गुरदीप सिंह ने इसे प्रबंधन का मनमाना रवैया करार देते हुए कहा कि यह कदम कर्मचारियों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित करने का प्रयास है। उनका कहना है कि हड़ताल किसी भी कर्मचारी का मौलिक अधिकार है और प्रबंधन का यह कदम न केवल अनुचित है बल्कि श्रम कानूनों का उल्लंघन भी है।
अखिल भारतीय इस्पात संघ के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि वे इस कार्रवाई के खिलाफ आवश्यक कदम उठाने की योजना बना रहे हैं।















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