

दुर्गापुर : दुर्गापुर के कांकसा क्षेत्र के राजबांध इलाके में इंडियन ऑयल डिपो के गेट के सामने टैंकर चालकों ने शनिवार को एक सामूहिक विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया। सुबह जैसे ही एक टैंकर के इंडियन ऑयल डिपो में प्रवेश करने की सूचना मिली, टैंकर चालकों ने गेट को बंद कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप कोई भी टैंकर तेल लोडिंग के लिए सरकारी तेल कंपनी के डिपो में दाखिल नहीं हो सका। इस विरोध प्रदर्शन में सैकड़ों टैंकर चालक शामिल हुए, जिससे क्षेत्र में तनाव का वातावरण उत्पन्न हो गया।

सूचना मिलने के तुरंत बाद, कांकसा थाने की एक बड़ी संख्या में पुलिस बल घटनास्थल पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। प्रदर्शनकारी चालकों का आरोप है कि एसोसिएशन के कुछ पदाधिकारी कई निजी परिवहन कंपनियों के साथ मिलकर टैंकरों में अवैध रूप से तेल की ढुलाई कर रहे हैं। इस प्रकार की गतिविधियों ने न केवल सरकारी कंपनी की छवि को धूमिल किया है, बल्कि क्षेत्र के कई टैंकर चालकों की आजीविका पर भी संकट के बादल खड़े कर दिए हैं।
इस बीच, टैंकरों के अनफिट होने की समस्याओं के कारण चालकों को कई टैंकरों की रद्दीकरण का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनकी कमाई को गंभीर नुकसान हुआ है। चालकों ने इस मामले में संगठन के उच्च अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन किसी भी प्रकार का समाधान नहीं निकला। परिणामस्वरूप, टैंकर चालकों ने चेतावनी दी है कि जब तक कंपनी के अधिकारी उनकी समस्याओं का समाधान नहीं करेंगे, तब तक वे किसी भी टैंकर को सरकारी तेल कंपनी में प्रवेश करने की अनुमति नहीं देंगे।
प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को स्पष्ट करते हुए कहा कि प्रशासन को इस गंभीर मुद्दे पर ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि उनके रोजगार को सुरक्षित रखा जा सके। टैंकर चालकों ने यह भी कहा कि उनका संगठन लंबे समय से उनकी समस्याओं को नजरअंदाज कर रहा है, और अब वे इस स्थिति के प्रति जागरूकता लाने के लिए मजबूर हो रहे हैं।
कांकसा थाने की पुलिस ने इस मामले को ध्यान में रखते हुए प्रदर्शनकारियों से संवाद करने का प्रयास किया। पुलिस का कहना था कि वे बातचीत के जरिए इस समस्या का समाधान खोजने की कोशिश करेंगे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस को यह आश्वासन दिया कि यदि प्रशासन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं करता है, तो वे अपने आंदोलन को और तेज करेंगे और आगे की रणनीति तय करेंगे।

इस घटना ने न केवल कांकसा क्षेत्र में तनाव उत्पन्न किया है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि टैंकर चालकों के अधिकारों और उनकी आजीविका की रक्षा के लिए एक प्रभावी और सकारात्मक संवाद की आवश्यकता है। स्थानीय प्रशासन को चाहिए कि वह इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्दी से जल्दी उचित कदम उठाए ताकि टैंकर चालकों की समस्याओं का समाधान किया जा सके।















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